पालीटेक्निक मैदान में लोगों द्वारा जलाया जा रहा कचरे से उठता धुआं। अमर उजाला
झांसी। शासन का फरमान है तो प्रशासन पराली जलाने पर किसानों पर धड़ाधड़ मुकदमे दर्ज कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ शहर में जगह-जगह कूड़ा जलाकर वायु प्रदूषण करने वाले लोगों की ओर जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं। नगर निगम के नियमित कूड़ा उठाने के दावे भी सवालों के घेरे में हैं।
देशभर में प्रदूषण को लेकर मचे शोर के बीच किसानों पर पराली जलाने को लेकर मुकदमे शुरू हो गए हैं। इसके पीछे की मंशा है कि वातावरण में फैल रहे प्रदूषण को रोका जा सके। चूंकि, शासन स्तर से इसको लेकर के दबाव है, इसलिए प्रशासन किसानों पर मुकदमे दर्ज करने में ज्यादा तेजी दिखा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ शहर के बीचों बीच वायु प्रदूषण पर जिम्मेदार आंख मूंदे हुए हैं। बुधवार की शाम चार बजे बीकेडी चौराहे के पास नगर निगम द्वारा रखे गए कंटेनर कूड़ा से पूरा भरा पड़ा था। स्थिति यह हो गई कि लोगों ने कंटेनर के चारों तरफ कूड़ा डालना शुरू कर दिया। जब तेज दुर्गंध होने लगी तो किसी ने उसमें आग लगा दी। आग से चारों तरफ धुएं का गुबार हो गया। वहीं, शाम पांच बजे के आसपास जीआईसी के अंदर से इतना धुआं उठ रहा था मानो आग लग गई हो। जबकि, वहां पर भी किसी ने कूड़े में आग अलग-अलग दो जगह पर लगा रखी थी।
इसके अलावा सीपरी बाजार सेंट्रल होटल के पीछे सालों से लोग कूड़ा जला रहे हैं। दोपहर दो बजे भी यहां पर धुएं का गुबार उठाता दिखा। क्षेत्रवासियों के मुताबिक यहां पर नगर निगम की तरफ से कूड़े का कंटेनर नहीं रखा है। इसलिए मजबूरी में लोग कूड़ा जला रहे हैं। वहीं, पॉलीटेक्निक के पास भी कूड़ा जलाया जा रहा है। बुधवार की शाम साढ़े पांच बजे यहां भी कूड़े में आग लगी मिली। कूड़ा जलाने से हो रहे वायु प्रदूषण पर जिम्मेदार आंख मूंदे हुए हैं। ये स्थिति नगर निगम की नियमित कूड़ा उठाने के दावों की भी पोल खोल रही है।
कूड़ा जलाने पर तो पहले से ही प्रतिबंध हैं। कूड़ा कौन जला देता है, यह जानकारी करना मुश्किल हो जाता है। विभाग के कर्मचारी कहीं पर भी कूड़ा न जलाएं, इसके निर्देश दिए जा चुके हैं। नियमित कूड़ा नहीं उठ रहा तो सूचना व फोन पर व्हाट्स-एप भी कर दें, तुरंत कार्रवाई की जाएगी। लोग भी डोर-टू-डोर कूड़ा नहीं देते हैं, जबकि बाहर खुले में और नालियों में फेंकते हैं। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर।