झांसी। बृहस्पतिवार की सुबह को करीब 8 बजे पूंछ इलाके में बच्चों को लेकर स्कूल जा रही तेज रफ्तार बस ढलान से उतरते वक्त बेकाबू हो गई। चालक ने जैसे ही ब्रेक लगाए तभी बस के खुले दरवाजे से गेट के पास कंडक्टर वाली सीट पर बैठी कक्षा तीन की छात्रा उछलकर नीचे गिर गई। मासूम के ऊपर से बस के पहिये उतर गए जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ने बस को नहीं रोका और दौड़ाकर स्कूल में ले गया। वहां से फरार हो गया। पुलिस ने स्कूल के प्रबंधक को हिरासत में ले लिया है।
एसपी (ग्रामीण) नैपाल सिंह के मुताबिक मूल रूप से जालौन निवासी अहसान खान पूछ कस्बे में आटा चक्की चलाते हैं। उनकी आठ साल की बेटी तहसीम एरच रोड स्थित विनायक पब्लिक स्कूल में कक्षा तीन की छात्र थी। रोजाना की तरह सुबह करीब साढ़े सात बजे वह स्कूल जाने के लिए बस में सवार हुई थी। तहसीम गेट के पास कंडक्टर वाली सीट पर बैठ गई। तेज रफ्तार बस एरच सर्विस रोड पर ढलान से नीचे उतर रही थी, उसी समय ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगाया। ब्रेक लगते ही खुले गेट से कंडक्टर सीट पर बैठी तहसीम उछलकर नीचे जा गिरी और पिछले पहिये की चपेट में आ गई। हादसे के बाद भी ड्राइवर ने बस नहीं रोकी और वहां से बस को लेकर सीधे स्कूल पहुंच गया। उधर, हादसे की सूचना मिलने पर पूंछ एसओ सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने बच्ची को मेडिकल कॉलेज भिजवाया। यहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने तहसीम को मृत घोषित कर दिया। उधर, हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां नसीमो का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक पिता की तहरीर पर प्रबंधक धर्मेंद्र सोनी, चालक भरत लाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। चालक की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
बार-बार गेट खोलना न पड़े, इसलिए रखते थे बस का गेट खुला
ड्राइवर के पास नहीं था कोई लाइसेंस
हादसे में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हुई है। बच्ची के परिजनों का कहना है कि जिस बस चालक की लापरवाही से हादसा हुआ, उसके पास वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद प्रबंधन ने उसे चालक के तौर पर रखा था। इसके अलावा बस में कोई कंडक्टर नहीं था। रोजाना बस से 19-20 बच्चे स्कूल जाते हैं। उनके चढ़ने के दौरान बस का दरवाजा बार-बार खोलना न पड़े, इस खातिर बस के दरवाजे को रस्सी लगाकर हमेशा के लिए खोल दिया गया था। यही हादसे की वजह बना। तहसीम के परिजनों के मुताबिक बस भी कंडम थी। इसकी कई बार स्कूल प्रबंधन से शिकायत की गई लेकिन, कोई ध्यान नहीं दिया गया।
रोजाना हो रहे हादसे फिर भी पुलिस-प्रशासन की नहीं टूटती नींद
स्कूली बच्चों को लेे जाने में कंडम वाहनों का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। अक्सर ही इन वाहनों से सड़कों पर हादसे हो रहे। मासूम बच्चों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही लेकिन, पुलिस-प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों के फिटनेस की कोई जांच पड़ताल नहीं होती। कई वाहनों के अपनी उम्र पूरी कर लेने पर उनको स्कूली वाहन के तौर पर लगाया गया है। वहीं, डीआईओएस ओम प्रकाश सिंह ने 27 सितंबर को एक आदेश जारी करके सभी स्कूली वाहनों को सुरक्षित करने का अभियान चलाने का निर्देश दिया था लेकिन, स्कूली प्रबंधन ने इन निर्देशों को भी अनसुना कर दिया।