झांसी। महिला पॉलिटेक्निक में बने हॉस्टल के चारों तरफ वीरान सन्नाटा रहता है। ये बड़े-बड़े पेड़ और झाड़ियों से घिरा हुआ है। दीवारें बदरंग हो चुकी हैं। हॉस्टल के आसपास लाइटें भी नहीं जलती हैं। ऐसे में शाम होते ही यहां पर अंधेरा छा जाता है। इन हालातों में पता नहीं कैसे छात्राएं हॉस्टल में रह पाती हैं।
पॉलिटेक्निक कॉलेज में हॉस्टल में रहने के लिए छात्राओं से फीस तो ली जाती है लेकिन सुरक्षा से लेकर व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं हैं। पॉलिटेक्निक हॉस्टल के पीछे आवासीय परिसर बना हुआ है। यहां से एक रास्ता कैंपस के लिए आता है। जिसका गेट बृहस्पतिवार की सुबह खुला मिला। कर्मचारी आवासों के पीछे लकड़ी लगाकर घरों को बांटा गया है। इन लकड़ियों के सहारे कोई भी व्यक्ति हॉस्टल कैंपस की दीवार पर चढ़ सकता है। चारों तरफ झाड़ियां और पेड़ पौधे इस कदर हैं कि कोई भी व्यक्ति इनमें छुपकर बैठ जाए तो देखना तक मुश्किल होगा। छात्राओं के डर और दहशत की एक बड़ी वजह ये भी है कि यहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। छात्राओं ने बताया कि सुरक्षा गार्डों की तैनाती हॉस्टल के गेट पर होनी चाहिए। ताकि, किसी भी तरह की समस्या होने पर वो बिना देरी के सूचना दे सकें। इसके अलावा यहां पर प्रकाश की भी उचित व्यवस्था कराई जाए। क्योंकि रात होने के बाद यहां पर बाहर कुछ दिखाई नहीं देता है। हॉस्टल के आसपास की सड़क भी बहुत जर्जर हो चुकी है।
छात्राओं को हॉस्टल की छत पर चलने की आहट हुई थी। हो सकता है कि किसी को भ्रम हुआ है। कुछ छात्राएं हॉस्टल छोड़कर चली गई हैं, जो जल्दी आ जाएंगीं। प्राचार्य को निर्देश दिए हैं कि हॉस्टल के आसपास चौकीदार लगातार भ्रमण करते रहें। छत की तरफ जाकर भी देखें। शनिवार को झांसी लौटने पर मैं भी कैंपस का निरीक्षण करूंगा। नए हॉस्टल के पास बने पीछे वाले गेट को दिन में भी बंद कराया जाएगा। - डीएम सिंह, ज्वाइंट डायरेक्टर, पॉलीटेक्निक।