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खटक रहीं हैं अटकी और भटकी योजनाएं

Thu, 20 Apr 2017 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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over bridge - फोटो : demo
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का झांसी दौरा समूचे बुंदेलखंड के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। उम्मीद है कि अब काम तेजी से आगे बढ़ेगा, फाइलें अलमारियों से निकलेंगी, गर्द छंटेगी और विकास का उजाला दिखेगा। कुछ योजनाओं का तो बजट न मिलनेे के कारण श्रीगणेश भी नहीं हो सका है। किसी की गति धीमी तो कोई कमी के कारण लटकी है। पेयजल, बिजली आपूर्ति, ओवरब्रिज और इसी तरह कई योजनाओं पर काम तो हो रहा है पर इनकी चाल मंद है। मुख्यमंत्री के काम की चाल और तेवर बता रहे हैं कि इन ठहरी और ठिठकी योजनाओं को गति जरूर मिलेगी। 
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एक नजर
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पेयजल महायोजना का श्रीगणेश नहीं
पांच साल से 916 करोड़ की पेयजल महायोजना फंसी है। कभी डिजाइन में कमी, कभी लंबी टेंडर प्रक्रिया और कभी कागजी खानापूरी न हो पाने के कारण इस पर काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। यदि यह योजना अमली जामा पहन ले तो किसी हद तक पेयजल संकट दूर हो सकता है।

रानी लक्ष्मीबाई टूरिस्ट सर्किट
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के तुरंत बाद रानी लक्ष्मीबाई टूरिस्ट सर्किट का खाका तैयार किया गया था। लक्ष्मीबाई से जुड़े स्थलों का पर्यटन विकास किया जाना था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। केंद्र सरकार आरोप लगाती रही है कि प्रदेश सरकार सहयोग नहीं कर रही है। लेकिन अब तो उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है।
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मैन्यूफैक्चरिंग जोन नहीं बना
क्षेत्र का औद्योगिक विकास हो, इसलिए 2014 में झांसी में नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग जोन बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। गरौठा और टहरौली में इसके लिए जमीन भी चिह्नित हो गई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन से उम्मीद जगी है कि इस दिशा में कदम आगे बढ़ेंगे।

गढ़मऊ झील का विकास अधर में
गढ़मऊ झील में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इसके विकास का खाका तैयार किया गया था। 5.26 करोड़ रुपये की इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने पहली किस्त के रूप में 1.17 करोड़ रुपये दे दिए थे। लेकिन, बाद में पैसा नहीं दिया गया। इस कारण काम अधूरा पड़ा है।

लक्ष्मीताल के हालात बदतर
ऐतिहासिक लक्ष्मीताल में शहर के बीस नालों का गंदा पानी जा रहा है, जिससे उसका पानी खराब हो गया है। तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा हो गया है। तालाब की बदहाली दूर करने के लिए पिछले कई वर्षों से योजना पर अमल हो रहा है, लेकिन तालाब की स्थिति जस की तस है।

सड़कें नहीं सुधर रहीं
महानगर में कचहरी चौराहा से बीआर पंप तक, इलाहाबाद बैंक चौराहा से रेलवे स्टेशन मार्ग तिराहा तक, गल्ला मंडी से बकरा मंडी रोड तक, जेल चौराहा से कचहरी चौराहा तक, श्री सिद्धेश्वर मंदिर से दतियागेट रोड और अशोक होटल तिराहा से स्टेशन रोड पर सड़क चौड़ीकरण और डिवाइडर बनाने का काम अटका हुआ है।

किसानों की सुध नहीं
गेहूं खरीद केंद्र पर लगातार दो दिन से समर्थन मूल्य से कम पर किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है। दो मामले पकड़े भी गए हैं। ऐसा नहीं है कि दोनों मामले दूरदराज के क्षेत्र में पकड़े गए हों, बल्कि एक मामला मऊरानीपुर और दूसरा झांसी में पकड़ा गया। इसके बाद भी न तो शासन का ध्यान है और न ही प्रशासन का। किसानों को नुकसान हो रहा है।

ये भी दरकार
ग्वालियर रोड क्रासिंग पर ओवरब्रिज
ग्वालियर रोड क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने के लिए रेलवे तैयार है। इसका प्रस्ताव प्रदेश शासन को भिजवा दिया गया है लेकिन अभी तक वहां से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण मामला अटका है। इस क्रासिंग से 24 घंटे के भीतर मालगाड़ियों सहित 70 ट्रेनें गुजरती हैं। लगभग 14 घंटे क्रासिंग बंद रहती है।

अस्पतालों में दवाएं नहीं 
बुंदेलखंड के हर क्षेत्र से मरीज मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए यहां आते हैं। इनमें अधिकांश मरीज गरीब तबके के होते हैं। लंबे समय से इन अस्पतालों में मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इससे मरीज बेहद परेशान रहते हैं। 

कांजी हाउस बेहद जरूरी
शहर में छुट्टा जानवरों की वजह से लोगों का सड़कों पर चलना दूभर बना रहता है। ये जानवर आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। अगर, महानगर में छुट्टा जानवरों के लिए कांजी हाउस बन जाए, तो काफी हद तक समस्या का निदान हो सकता है। 

पार्किंग की व्यवस्था नहीं 
महानगर का धीरे-धीरे विस्तार होता जा रहा है। महानगर के सभी भीड़भाड़ और चौराहों के आसपास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। पार्किंग न होने के कारण लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जिससे शहर की खूबसूरती खराब होती है। ट्रैफिक का भी कोई प्लान नहीं है। 
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