आने वाले दिनों में महानगर की स्ट्रीट लाइटें खुद चालू होंगी और खुद ही बंद हो जाएंगी। इसके लिए एक कमांड सेंटर बनाकर उसमें टाइमर लगाया जाएगा। वहीं, खराबी जांचने के लिए स्ट्रीट लाइट के खंभों की नंबरिंग करेगी और उसे ग्राउंड पोजीशिनिंग सिस्टम (जीपीएस) से जोड़ा जाएगा। इसके लिए नगर निगम का इनर्जी इफीसियंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) कंपनी से करार हुआ है। इस व्यवस्था से दिन में स्ट्रीट लाइट जलने की समस्या और बिजली की अतिरिक्त खपत से मुक्ति मिलेगी।
इनर्जी इफीसियंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) एलईडी बल्ब बनाती है। कंपनी से नगर निगम का करार हो गया है। कंपनी पांच साल में पुरानी स्ट्रीट लाइट निकालकर उसके स्थान पर एलईडी बल्ब लगाएगी। अभी करीब 3.50 करोड़ रुपये सालाना बिजली के बिल पर खर्च होता है, लेकिन एलईडी लगने से इसमें बचत होने लगेगी। बिल में जो बचत होगी, वह पैसा कंपनी को दिया जाएगा। कंपनी शहर के सभी बिजली के खंभों की नंबरिंग करेगी और कमांड सेंटर बनाकर उसे ग्राउंड पोजीशिनिंग सिस्टम (जीपीएस) से जोड़ा जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि जिस खंभे की स्ट्रीट लाइट खराब होगी, पार्षद अथवा किसी व्यक्ति का फोन आएगा तो उस खंभे को तत्काल ट्रेस कर लिया जाएगा और यह भी चेक हो जाएगा कि स्ट्रीट लाइट का बल्ब खराब है अथवा अन्य कोई कमी है। जानकारी मिलने पर उसे सही कर दिया जाएगा। इससे न केवल पार्षद बल्कि आम जन को स्ट्रीट लाइट सुधरवाने के लिए नगर निगम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी पार्कों, चौराहों और सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा की बिजली रोशन होगी। शहर में कुल बिजली की खपत का दस प्रतिशत सौर ऊर्जा से पूरा किया जाएगा।
पहले चरण में इलाहाबाद नगर निगम में काम चल रहा है। जबकि, दूसरे चरण में झांसी के अलावा वाराणसी, और गोरखपुर में काम शुरू होगा।
पांच साल में लग जाएंगी एलईडी
इनर्जी इफीसियंसी सर्विस लिमिटेड से नगर निगम का कांट्रेक्ट हो गया है। अब स्ट्रीट लाइट में एलईडी बल्ब लगाए जाएंगे और लाइट खराब होने पर पार्षदों को परेशान नहीं होना पड़ेगा, बल्कि उनकी शिकायत को तत्काल सही कराया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से पांच साल में शहर की सभी स्ट्रीट लाइट बदल जाएंगी।
- अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त