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सड़क पर बिछेगा ‘पर्यावरण का दुश्मन’

Mon, 21 Dec 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। पर्यावरण के दुश्मन प्लास्टिक कचरे से निपटने का तरीका ढूंढ लिया गया है। अब प्लास्टिक कचरे को डामर के साथ गलाकर सड़क निर्माण में प्रयोग किया जाएगा। सड़क निर्माण में डामर के सापेक्ष प्लास्टिक की मात्रा आठ प्रतिशत होगी। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने इसके लिए गजट जारी कर दिया है।
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प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। प्लास्टिक कचरा जमीन में मिल जाए तो उसे बंजर कर देता है, इतना ही नहीं सैकड़ाें साल तक यह मिट्टी में नहीं मिलता है। केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए फरवरी 2011 में गजट जारी कर सभी नगर निकायों को प्लास्टिक कचरा अलग से संग्रहित करने के निर्देश दिए थे।

केंद्र के निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम झांसी ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की अलग से इकाई गठित कर प्लास्टिक कचरा संग्रहित करना शुरू कर दिया था। नगर निगम कचरा तो संग्रहित करती जा रही है, लेकिन उसको उपयोग में नहीं ला पा रही थी। इस समस्या के समाधान अब केंद्र सरकार ने ही कर दिया है।
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पर्यावरण मंत्रालय ने 26 नवंबर को गजट जारी कर कहा है कि देश में डामर से बनने वाली सड़कों में आठ प्रतिशत मात्रा प्लास्टिक की होनी चाहिए। यह प्लास्टिक सड़क बनाने वाले ठेकेदारों द्वारा नगर निकायों द्वारा संग्रहित किए गए प्लास्टिक में से खरीदना होगा। इसके लिए ठेकेदार को छह रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान करना होगा। इस आदेश से प्लास्टिक कचरे को आसानी से ठिकाने लगाया जा सकता है।

यह प्लास्टिक मिलेगी डामर के साथ
डामर के साथ हॉट मिक्सर में वह ही प्लास्टिक मिलाई जाएगी, जो 150 से 205 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर मिक्स हो सके। पीवीसी व पतला प्लास्टिक डामर के साथ नहीं मिलाया जाएगा। एचडीपीई व मोटा प्लास्टिक को डामर के साथ मिक्स किया जाएगा।

30,000 किलो प्रतिदिन निकलता है प्लास्टिक कचरा
झांसी महानगर में प्रतिदिन 30,000 किलो प्लास्टिक कचरा निकलता है। नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट द्वारा करीब 5,000 किलो प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन कलेक्ट किया जा रहा है। 25,000 किलो कचरा प्रतिदिन अभी भी अन्य कचरे में मिक्स होकर पर्यावरण को प्रदूषित करने का काम कर रहा है।
बॉक्स
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पश्चिम बंगाल में हुआ था प्रयोग
प्लास्टिक वेस्ट को सड़क निर्माण में मिलाने का पहला प्रयोग पश्चिम बंगाल में हुआ था। वर्ष 2009 में वहां डामर सड़क निर्माण में प्लास्टिक को मिलाया गया था, इसका परिणाम अच्छा आया था। प्रयोग के सफल होने के बाद वहां की सरकार ने इसका प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र को भेजा था।
वर्जन
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सरकार के इस फैसले से प्लास्टिक कचरे को व्यवस्थित करने में काफी मदद मिलेगी। डामर के साथ सड़क में मिलकर प्लास्टिक कचरा प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। वहीं, सड़क को मजबूत बनाने का कार्य करेगा।
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राकेश सोलंकी, चीफ एग्जीक्यूटिव, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट, नगर निगम, झांसी।
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