कार्रवाई के डर से ओरछा गेट स्थित कसाई मंडी में भैंसा मांस का कारोबार बृहस्पतिवार को ठप रहा। दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। कुछ कारोबारियों के पास लाइसेंस तो है, लेकिन उसे रिन्यू नहीं कराने से वह बेकार हो गया है। वहीं, अब नगर निगम भी लाइसेंस रिन्यू नहीं कर रहा है। ऐसे में उनकी परेशानी बढ़ गई है।
नगर निगम ने बुधवार को आदेश जारी कर कहा था कि मांस का अवैध कारोबार करने वाले दुकानें बंद कर दें, यदि जांच में कोई पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश का बृहस्पतिवार को असर दिखा। स्थिति यह रही कि ओरछा गेट स्थित कसाई मंडी में मांस की सभी दुकानें सुबह से ही बंद रहीं। दुकानदार बैठे रहे, उन्हें चिंता सताती रही कि अब शायद उनकी दुकान नहीं चल पाएगी। दुकानदारों की दिक्कत यह है कि उनके पास भैंसा मांस बिक्री का लाइसेंस तो है, लेकिन 2013 के बाद से उसका रिन्यूवल नहीं किया गया है। इस कारण सभी लाइसेंस बेकार हैं। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। क्योंकि, नगर निगम लाइसेंस का रिन्यूवल नहीं कर रहा है।
अकेले ओरछा गेट क्षेत्र में 50 से अधिक दुकानें हैं। मुकरयाना, गरिया फाटक, सीपरी बाजार और ऐवट मार्केट में भैंसा मांस की दुकानें हैं। इस कारोबार से तीन हजार से अधिक परिवारों का भरण पोषण होता है। यानी भैंसा मांस के कारोबार से करीब 15 हजार की आबादी सीधे जुड़ी है। लेकिन, नगर निगम के आदेश से कारोबार से जुड़े परिवारों के सामने रोजी-रोटी का खतरा मंडराने लगा है।
लाइसेंस के लिए दौड़े नगर निगम
मांस बिक्री का लाइसेंस रिन्यूवल कराने के लिए दुकानदार बृहस्पतिवार को नगर निगम पहुंचे। इस दौरान करीब 22 आवेदन आए। लेकिन, उन सबसे कह दिया गया कि एक अप्रैल के बाद ही लाइसेंस जारी होंगे। लाइसेंस बनवाने के लिए छह सौ रुपये सालाना फीस जमा होगी। यदि कोई दुकानदार लाइसेंस लेने में लेट हो जाता है तो प्रति माह पचास रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
यहां खोल सकते हैं मांस की दुकान
अन्य दुकानों की तरह मांस की दुकान शहर में हर कहीं नहीं खोली जा सकती है, बल्कि इसके लिए शहर में स्थान चिह्नित हैं। मुहल्ला कुंजड़याना, ढिमरयाना, मुकरयाना, ओरछा गेट अंदर और ओरछा गेट बाहर, सैंयर गेट और सिविल लाइन में ही मांस की दुकान खोलने की अनुमति दी जा सकती है।
यह है मानक
मांस बिक्री के लिए दुकानदार के लिए जरूरी है कि माह में कम से कम एक बार दुकान पर सफेदी करवाए। दुकान पर खुले में मांस न टांगें, बल्कि पर्दे लगाएं। दुकान पर गंदी डलिया न रखें तथा साफ-सफाई नियमित करें। मांस बिक्री के लिए दुकान का लाइसेंस एक साल के लिए ही बनता है। इसलिए इसे हर साल रिन्यूवल कराएं। पशु चिकित्सक की जांच के बाद ही जानवर का वध करें।
लाइसेंस विभाग पर भी कसेगा शिकंजा
अब नगर निगम के लाइसेंस विभाग पर भी सख्ती बरती जाएगी। विभाग के पास लाइसेंस का रिकार्ड तो है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को अधिकृत जानकारी नहीं है। लाइसेंस से मिलने वाले राजस्व का लेखा-जोखा भी उच्च अधिकारियों को पता नहीं चल पा रहा है।
कड़ाई से होगा पालन
अब उन्हें जिम्मेदारी मिल गई है। शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। दुकानों की जांच के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें क्षेत्रों में जाएंगी। बिना लाइसेंस के मांस बेचने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
- डॉ. आर के निरंजन, पशु चिकित्साधिकारी