झांसी। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने से भीड़भाड़ बढ़ गई है। मुसाफिरों से यात्री शेड ठसाठस भरा रहता है। इससे यात्रियों के लिए उमस भरी गर्मी में पल- पल काटना मुश्किल रहता है। खाने- पीने की वस्तुओं के लिए भी यात्री तरसते रहते हैं। उनके बीच सामाजिक दूरी का पालन भी नहीं हो पा रहा है।
कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया । स्टेशन पर जहां 24 घंटे हलचल रहती थी, वहां तीन महीने तक सन्नाटा पसरा रहा। धीरे- धीरे ट्रेनों की संख्या बढ़ने से स्टेशन पर यात्रियों की हलचल बढ़ती जा रही है। अभी झांसी स्टेशन से अप और डाउन की 50 ट्रेनें गुजर रहीं हैं। हर रूट पर ट्रेनें उपलब्ध हैं। प्रतिदिन पांच से सात हजार यात्री सफर कर रहे हैं। मगर, ट्रेन के आने के 90 मिनट पहले ही यात्रियों को प्लेटफार्म पर प्रवेश मिलने के कारण उनको यात्री
शेड में ही वक्त गुजारना भारी पड़ रहा है। धूप के कारण यात्री इधर- उधर बैठ नहीं पाते हैं। इस कारण यात्री शेड में पैर रखने की जगह नहीं रहती है। यात्री शेड में मात्र आठ पंखे ऊंचाई पर लगे हैं, जिनसे हवा भी नीचे तक नहीं लग पाती है। शौचालय गंदगी से पटा रहता है। ठंडे पानी का भी इंतजाम नहीं है। चूंकि, बुंदेलखंड के अलावा लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर की तरफ से आने वाले तमाम यात्री झांसी स्टेशन से ही ट्रेन बदलकर जाते हैं। इस कारण यात्री घंटों पहले झांसी आ जाते हैं। ऐसे में उनको वक्त गुजारना भारी पड़ जाता है।
कई कामगारों का डूबा किराया
बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार झांसी स्टेशन से दूसरे शहरों में मजदूरी करने के लिए लौट रहे हैं। इनमें तमाम ऐसे यात्री रहते हैं, जो वेटिंग का टिकट बनाकर आते हैं। उनसे कहा जाता है कि अंतिम चार्ट बनने पर सीट कंफर्म हो जाएगी। साबरमती, मंगला, कुशीनगर, पुष्पक समेत ऐसी कई ट्रेनें हैं जिनमें अंतिम चार्ट बनने पर टिकट कंफर्म नहीं हो पा रहा है। चूंकि, तमाम यात्रियों को इस बात की जानकारी नहीं रहती है कि चार घंटे पहले तक कंफर्म और आधे घंटे पहले तक वेटिंग का टिकट निरस्त होता है। इसके बाद किराए की वापसी नहीं होती है। जानकारी के अभाव में कई जरूरतमंद यात्रियों का पैसा डूब गया है।
गुटखा व चाय बेचने वाले सक्रिय
यात्री शेड के आसपास खानपान की दुकानों का इंतजाम न होने के कारण यहां पर गुटखा व चाय बेचने वाले अनाधिकृत वेंडर सक्रिय हो गए हैं। यात्रियों को बेहद खराब चाय महंगे दामों में बेची जा रही है। नकली गुटखा, बीड़ी, सिगरेट भी आरपीएफ और जीआरपी की मौजूदगी में बिकती रहती है।