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Jhansi News: अपनी प्रतिभा से शुरू किया स्टार्टअप...अब महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। एक सपने के साथ संघर्ष करने वालों की राह में सफलता के फूल जरूर खिलते हैं। मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री लेने के बाद प्रतिभा ने नौकरी की जगह खुद का व्यापार करने की ओर कदम बढ़ाया तो शुरुआती दौर में मुश्किलें आईं। बुंदेलखंड की चितेरी कला का जादू उनकी अंगुलियों में बसता है। उन्होंने अपने इस हुनर को हस्तनिर्मित स्टार्टअप में बदला और इसे खुद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि चार ब्लॉकों की महिलाओं को स्वरोजगार से भी जोड़ा है। अब उनके हस्तनिर्मित उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। हाल में वेबसाइट लांच की है। उनका स्टार्टअप मुनाफे में है, मगर अभी वह इसे व्यापार में ही लगा रही हैं।

रेलवे स्टेशन रोड की रहने वाली प्रतिभा डोंगरे बताती हैं कि तीन भाइयों में सबसे छोटी होने के कारण उन्हें घर से पढ़ाई के लिए ही निकलने की इजाजत थी। पेंटिंग में बचपन से ही रुचि थी। मास्टर डिग्री लेने के बाद उन्होंने वर्ष 2021 में नेहरू युवा केंद्र में नौकरी की। इसके बाद बबीना ब्लॉक में स्वयंसेवक बनीं तो ग्रामीण महिलाओं को एक-एक पैसे के लिए मोहताज देखकर सोचा कि वह इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ करेंगी।
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उन्होंने वर्ष 2022 में अपनी चितेरी कला की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई तो लोगों को उनकी तस्वीरें भा गईं। ये बिकीं तो प्रतिभा ने इसी के साथ स्टार्टअप करने की ठान ली। घर में ही जूट के उत्पाद बनाने की शुरुआत कर दी। सम्मान समारोहों के लिए चित्रकला के दुपट्टे, शील्ड, मेडल तैयार करती हैं। काम बढ़ने लगा तो राइज इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़ गईं। इसके बाद मुख्यमंत्री उद्यम योजना से पांच लाख रुपये का ऋण लिया।

उनकी लगन को देखकर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत उन्हें सरस प्रोडक्ट का कार्यालय दिया गया, जहां वह प्रशिक्षण केंद्र चला रही हैं। चार ब्लॉकों की 25 महिलाएं हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन्हें बाजार भी मिल रहा है। प्रतिभा का कहना है कि बबीना, बड़ागांव, बंगरा और चिरगांव ब्लॉकों की 100 से ज्यादा महिलाओं को घरों में भी काम करने के लिए कच्चा माल देती हैं। महिलाएं पांच से छह हजार रुपये तक प्रतिमाह कमा रही हैं। प्रतिभा का कहना है कि अभी शुरुआत है, सपना खुद की कंपनी तक खोलने का है। सरकारी मदद ने उनकी राह को आसान बनाया है।
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