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छात्रवृत्ति से खुद पढ़े और भाइयों को भी पढ़ाया

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छात्रवृत्ति से खुद पढ़े और भाइयों को भी पढ़ाया
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झांसी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि विद्यार्थी जीवन में उन्हें दो बार छात्रवृत्ति मिली। पहले कक्षा आठवीं तक और उसके बाद स्नातक की पढ़ाई के दौरान। सरकार की ओर से मिलने वाली इस राशि से वह खुद तो पढ़े ही और अपने भाइयों को भी पढ़ाया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने का काम करती है।
एसएसपी डा. ओपी सिंह बहराइच के कृषक परिवार से हैं। कक्षा में प्रथम आने पर उन्हें कक्षा आठवीं तक छात्रवृत्ति मिलती रही। इंटरमीडिएट के बाद वह इलाहाबाद आ गए। स्नातक की पढ़ाई इलाहाबाद में ही रहकर की। स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्हें 1987 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से प्रतिमाह 3200 रुपये की छात्रवृत्ति मिली। साथ ही किताबें खरीदने के लिए पांच हजार रुपये वार्षिक मिलते थे। एसएसपी ने बताया कि उस समय इतनी राशि बहुत बड़ी होती थी। इस सरकारी मदद से न केवल वह अपना पूरा खर्च उठा लेते थे, बल्कि दो छोटे भाइयों की शिक्षा का प्रबंध भी इलाहाबाद में आसानी से कर लिया करते थे।
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एसएसपी ने कहा कि छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली आर्थिक सहायता विद्यार्थी का मनोबल बढ़ाने का काम करती है। इसके अलावा जब एक विद्यार्थी को छात्रवृत्ति मिलती है, तो उसके पीछे वाले भी इसे हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए वह भी मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। छात्रवृत्ति मिलने से विद्यार्थियों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
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