झांसी। भागवत कथा व्यास पंडित कृष्ण चंद्र शास्त्री ने कहा कि गुरु से कपट और मित्र से चोरी नहीं करना चाहिए। अन्यथा इसका परिणाम भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संत और भगवान से दूर रहेंगे, तो विलासिता रूपी भूख बढ़ती ही जाएगी।
पारीछा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन दिवस उन्होंने प्रवचन में कहा कि सुदामा गरीब जरूर थे। लेकिन दरिद्र नहीं थे। वह परमात्मा के परम भक्त थे। भागवत कथा व्यास ने कहा कि जीवन के प्रत्येक कर्म को परमात्मा को समर्पित करना चाहिए। यदि ऐसा करेंगे, तो हमें अवश्य ही सफलता जीवन में हर समय प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि सुदामा के मन में त्याग है। ब्राह्मण को यज्ञ, जप, ब्राह्मणत्व आदि कर्म कर धन कमाना चाहिए। धर्म के मार्ग पर चलकर पांडवों ने कौरवों व उनकी विशाल सेना को पराजित कर दिया था। अच्छा संकल्प लो, भगवान स्वयं उसे पूर्ण करेंगे।
प्रवचन अवसर पर कृष्ण सेवा संस्थान एवं भक्ति पथ ट्रस्ट वृंदावन के संचालक भागवताचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि धर्म के दस लक्षण है। इनमें धैर्य, क्षमा, इंद्रियों का दमन, बुद्धि का सदुपयोग आदि है। यदि हम इन पर चलेंगे, तो हमारा जीवन धर्ममय बन जाएगा। कथा व्यास ने मोहक भजन सुनाए, जिन पर श्रद्धालु जमकर झूमे। इससे पहले यजमान विधायक राजीव सिंह, कमली सिंह ने श्रीमद भागवत कथा की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर अयोध्या के महंत वैदेही बल्लभ शरण, महावीर दास ब्रह्मचारी, रमाकांत व्यास, मनोज चतुर्वेदी, वासुदेवानंद, गोपाल दास, विधायक मनीषा अनुरागी, महापौर रामतीर्थ सिंघल, सीडीओ निखिल टीकाराम फुंडे, जयदेव पुरोहित, डा. साधना कौशिक, केपी राजपूत, अनिल श्रीवास्तव, अमर सिंह कुशवाहा, राजेश पाल, हरीओम थापक, बीटू राय, मुकेश मिश्रा, अजय जी आदि मौजूद रहे।