- सपा के मान सिंह ने एक साल से शुरू किया था वोटर बनाने का काम, सभी जिलाध्यक्षों को भी पार्टी ने किया था सक्रिय
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में सपा का वोटर बनाने का फॉर्मूला कामयाब हो गया। पहले से ही सपा के एमएलसी होने के नाते डॉ. मान सिंह ने करीब एक साल पूर्व से ही वोटर बनाने का काम शुरू कर दिया था। वहीं, सत्ताधारी दल भाजपा को चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी की घोषणा करना भारी पड़ा।
इलाहाबाद-झांसी सीट पर स्नातक एमएलसी चुनाव का परिणाम इस बार भी सत्ताधारी दल भाजपा के पक्ष में नहीं रहा है। दूसरी तरफ, भाजपा की हार का अंतर भी इस बार काफी बढ़ गया है। इससे भाजपा खेमे में निराशा है। दूसरी तरफ, सपा के कार्यकर्ता जीत से काफी उत्साहित हैं। चुनाव परिणाम के बाद नफा-नुकसान का भी दोनों पार्टियां अपने स्तर से आंकलन कर रही हैं।
सूत्रों की मानें तो चूंकि, यह सीट पहले से ही सपा के पास थी। ऐसे में सपा ने करीब साल भर पहले से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। मान सिंह को भी काफी पहले पार्टी नेतृत्व से इशारा मिल गया था कि फिर से तैयार करें। उन्हें ही प्रत्याशी बनाया जाएगा। चुनाव से काफी पहले उनके नाम पर पार्टी ने मुहर भी लगा दी। ऐसे में डॉ. मान सिंह को चुनाव तैयारी का काफी समय मिला गया। बताया गया कि एक साल पहले ही उन्होंने वोटर बनाने का काम शुरू कर दिया। फिर निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले झांसी समेत सभी 10 जिलों के सपा जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों को भी वोटर बनाने के अभियान में सक्रिय किया गया।
सपा एमएलसी एवं प्रत्याशी के गृह जनपद में ही सबसे ज्यादा 1.15 लाख वोटर बने। 25,220 मतदाताओं के साथ निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटर बनाने में झांसी दूसरे पायदान पर रहा। भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार राठौर के गृह जनपद जालौन में 20,999 मतदाता रहे। चूंकि, भाजपा 24 साल बाद पिछली बार ये सीट हारी थी। दूसरी तरफ, प्रत्याशी का एलान भी नामांकन की समयसीमा खत्म होने के कुछ दिन पहले ही किया गया, ऐसे में अशोक राठौर को मतदाता बनाने का ज्यादा समय नहीं मिल सका। पार्टी स्तर पर ही जो मतदाता बनाए गए थे, वह उसके भरोसे रहे। नतीजतन उन्हें बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा। जबकि, सपा का काफी समय पहले से वोटर बनाने का फॉर्मूला कामयाब हो गया।
2027 के विस चुनाव से पहले सपा को मिली संजीवनी
यूपी में 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे ठीक पहले इलाहाबाद-झांसी सीट पर आए परिणाम से सपा को संजीवनी मिल गई है। बताया गया कि संपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र में करीब 40 सीटें हैं।
पुरानी पेंशन, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय समेत कई मुद्दों पर मतदान
बताया गया कि चुनाव में स्नातक मतदाताओं ने कई मुद्दों पर मतदान किया। इसमें शिक्षकों की ओर से पुरानी पेंशन लागू करने, लंबे समय से बेसिक शिक्षकों का प्रमोशन न होने, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने से लेकर शिक्षामित्रों, अनुदेशकों आदि मुद्दे शामिल है। सपा ने इन्हीं मुद्दों को चुनाव में जोर-शोर से उठाया और समाधान का भरोसा दिया। इससे भी कई स्नातक मतदाताओं का झुकाव सपा की ओर रहा।
जीत-हार पर ये बोले पदाधिकारी
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लखनऊ में होने वाली बैठक में चुनाव परिणाम का विश्लेषण किया जाएगा। संगठन ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा है। फिर भी कहां चूक रह गई, उसकी समीक्षा होगी। सभी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने चुनाव में कड़ी मेहनत की है।
- रामकिशोर साहू, क्षेत्रीय अध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र, भाजपा।
पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता ने इस चुनाव में जी-जान से मेहनत की है। इसी के परिणामस्वरूप पिछली बार से भी बड़े अंतर से सपा को जीत मिली है। पीडीए ने सपा के पक्ष में मतदान किया है। अब 2027 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है।
- बृजेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष, सपा।