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चेन पुलिंग रोकने के लिए सेक्शन व ट्रेनें चिह्नित

Mon, 19 Nov 2018 01:07 AM IST
jhansi
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spot marked for chain puling - फोटो : demo
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ट्रेन में सफर के बीच में बेवजह जंजीर खींचना महंगा पड़ेगा। आरपीएफ ने रोक लगाने के लिए सख्ती बरतने की तैयारी शुरू कर दी है। जिसके तहत मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों व जिन स्थानों पर ज्यादा चेन पुलिंग हो रही है, उन स्थानों को भी चिह्नित कर लिया है। साथ ही, सादा वर्दी में भी पुलिसकर्मियों को लगाया गया है, जो केवल चेन पुलिंग के मामलों पर ही नजर रखेंगे। मंडल के ललितपुर समेत अन्य स्टेशनों पर निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं।
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आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन की बोगियों में जंजीर दी जाती है, जिसे खींचकर कहीं भी ट्रेन को रुकवाया जा सकता है। आमतौर पर चेन पुलिंग तब की जाती है। जब कोई सहयात्री छूट जाए, ट्रेन में आग लग जाए, स्टेशन पर परिजन रह जाएं, बुजुर्ग या दिव्यांग यात्री साथ हो और उन्हें ट्रेन में बैठाने में अधिक वक्त लगे, अचानक बोगी में किसी की तबीयत बिगड़ जाना, झपटमारी-चोरी, डकैती और छापेमारी व अन्य आपातकालीन स्थितियों के बीच चेन पुलिंग की जा सकती है। लेकिन, कुछ समय से बेवजह चेन पुलिंग के मामले सामने आ रहे हैं। लगातार हो रही चेन पुलिंग की घटनाओं को रेलवे ने गंभीरता से लिया है। जिसके तहत आरपीएफ ने ट्रेन नंबर 12616 जीटी एक्सप्रेस, 11057 दादर-अमृतसर एक्सप्रेस, 12447 यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, 15206 चित्रकूट एक्सप्रेस समेत बारह ट्रेनों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, बीना से झांसी सेक्शन, बीना से ललितपुर, ललितपुर से झांसी, कोटरा से ग्वालियर, चित्रकूट से बदौसा और झांसी से कोटरा सेक्शन को चिह्नित किया गया है। यहां सबसे अधिक चेन पुलिंग के मामले सामने आ रहे हैं।


ऐसे करती हैं काम
अलार्म वाली जंजीरें ट्रेन के मुख्य ब्रेक पाइप से जुड़ी होती हैं। इस पाइप में हवा का दबाव होता है, जिससे ट्रेन रफ्तार में चलती है। मगर चेन पुलिंग के वक्त ये हवा बाहर निकल जाती है। हवा के दबाव में आई कमी के कारण ट्रेन की रफतार धीमी होती है, जिसके बाद लोको पायलट उसे रोकता है। पूर्व में ट्रेन की बोगियों की दीवारों पर हर तरफ जंजीर दी जाती थीं, मगर गलत इस्तेमाल होने के चलते रेलवे ने इनकी संख्या घटा दी। अब इन्हें हर बोगी के केवल बीच में दिया जाता है।
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लेट होती हैं ट्रेनें
बार-बार पांच मिनट के अंतराल पर किसी भी ट्रेन में वैक्यूम करने पर गाड़ियों के विलंब होने की पूरी संभावना बनी रहती है। ऐसे में जिस गाड़ी में वैक्यूम किया जाता है उसके बाद पीछे आ रही ट्रेनें पिट जाती हैं। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों को भी परेशानी होती है।

वाणिज्य विभाग तैयार करता है ब्योरा
अभी तक रेलवे एक्ट 1989 की धारा 141 के तहत चेन पुलिंग होने पर पकड़े जाने पर अधिकतम 1000 रुपये का जुर्माना या एक साल तक की कैद का प्रावधान है। आरपीएफ का जांच अधिकारी रेलवे के वाणिज्य विभाग को केस की डिटेल भेजकर होने वाले नुकसान का ब्योरा मांगता है। वाणिज्य विभाग ट्रेन कुल कितने मिनट लेट हुई। इससे रेलवे को कितना नुकसान हुआ, बकायदा इसका पूरा हिसाब बनाकर आरपीएफ को देता है।

चेन पुलिंग रोकने के लिए आरपीएफ की तरफ से अभियान छेड़ दिया गया है। जो भी चेन पुलिंग करते पकड़े जा रहे हैं उनको मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा रहा है। साथ ही यात्रियों को जागरूक किया जा रहा है कि वे बेवजह चेन पुलिंग न करें।
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सारिका मोहन
वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त
रेलवे सुरक्षा बल
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