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बछड़ों को तो कोई मुफ्त में नहीं लेता

Mon, 19 Nov 2018 12:56 AM IST
jhansi
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cow calf - फोटो : demo
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मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार केबी राजू ने रविवार को राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र भरारी फार्म का निरीक्षण किया। उन्होंने गायों में दूध, बछड़ों का बाजारू मूल्य और किसानोें के बीच उनकी अहमियत के बारे में कर्मचारियों से बातचीत की। बताया गया कि बछड़ों को बाजार में कोई मुफ्त में भी नहीं खरीद रहा है। यही कारण है कि छुट्टा जानवरों की समस्या बढ़ी है।
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बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों की समस्या के समाधान को मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार केबी राजू ने भरारी फार्म का निरीक्षण किया। उन्होंने कर्मचारियों से जानना चाहा कि गायों के बछड़ों की क्या अहमियत है। किसानों का इनके प्रति क्या रुझान है। बाजार में यदि बछड़े को बेचा जाए तो किसान कितनी कीमत लगाते हैं। स्टाफ ने बताया कि बछड़े को यदि बेचने जाओ को मुफ्त में भी कोई खरीदार नहीं मिलता है। जबकि, बछड़ा चार साल में तैयार होता है। उन्होंने पूछा कि थारपरकर नस्ल का यदि बछड़ा हो तो उसकी क्या अहमियत रहेगी। इस पर जवाब मिला कि बछड़े की कोई कीमत नहीं है, क्योंकि किसान अब खेती ट्रैक्टर से करते हैं। इसलिए बछड़ों में उनका रुझान नहीं है। यदि बछड़ों की नीलामी भी करते हैं तो कोई ग्राहक नहीं आता।
उन्होंने सैक्स सीमन (कृत्रिम गर्भाधान) से बछिया नस्ल को बढ़ावा देने के बारे में भी पूछा। सभी ने सकारात्मक जवाब दिया। पूछा कि गाय कितना दूध देती है, तो बताया कि 14 से 15 लीटर तक। उन्होंने पूछा कि बछिया की कितनी मांग है और अच्छी नस्ल की गाय कितनी कीमत में बिकेगी। बताया गया कि 30 से 40 हजार रुपये तक मिल सकते हैं। गायों के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार जालौन के एट फार्म के लिए रवाना हो गए। इस मौके पर उपनिदेशक, अपर निदेशक पशु पालन समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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