अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आदेश मेडिकल कॉलेज में हवा में उड़ाए जा रहे हैं। वार्डों में भर्ती रोगी और तीमारदारों की सीढि़यां चढ़ने-उतरने में सांस फूल रही है। 12 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद अभी तक लिफ्ट चालू नहीं हुई है।
मेडिकल कॉलेज के वार्डों और ओपीडी की चार लिफ्ट करीब 10 माह से खराब होने की वजह से बंद हैं। इस वजह से रोगियों और तीमारदारों को सीढि़यों से आवागमन करना पड़ता है। अक्तूबर में जब अमर उजाला ने प्रमुखता से लोगों की दिक्कत को उठाया तो उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने तत्काल लिफ्ट को सही कराने अथवा सही नहीं होने पर नई लगवाने के आदेश दिए। इस पर कॉलेज प्रशासन ने लिफ्ट लगाने वाली कंपनी को 12 लाख रुपये में लिफ्ट सही करने की जिम्मेदारी सौंपी। कंपनी ने लिफ्ट सही करने का दावा करते हुए चालू कराने के लिए कहा। इस पर प्राचार्य कार्यालय ने एसआईसी को लिफ्ट चलाने के लिए कर्मियों को तैनात करने के लिए कहा मगर कर्मचारी नहीं मिले। परिणाम यह हुआ कि 12 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद लिफ्ट बंद ही खड़ी रही। जब तत्कालीन प्राचार्य ने लिफ्ट चालू कराने के आदेश दिए तो एसआईसी ने कंपनी से सुरक्षा की गारंटी मांगी। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि कंपनी की तरफ से सुरक्षा की गारंटी भी दे दी गई है मगर अभी तक लिफ्ट को चालू नहीं किया गया है। वहीं, लिफ्ट सही करने वाली कंपनी ने कॉलेज प्रशासन को 12 लाख खर्च के बिल थमा दिए हैं।
सीएमएस डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि कंपनी ने अपने स्तर से लिफ्ट सही करके बिल के कागज जमा कर दिए थे। लिफ्ट में खामी मिली तो 28 नवंबर तक सही करने का दावा किया था। जिसके चलते कंपनी के भुगतान पर रोक लगा दी है।