झांसी। कोरोना महामारी के दौरान रेलवे नियमित ट्रेनों को ही धीरे- धीरे स्पेशल बनाकर चला रहा है। स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को सुपरफास्ट का अतिरिक्त चार्ज देना पड़ता है। दूसरा वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग आदि को किराए में छूट भी नहीं देनी पड़ती। इस फायदे के कारण रेलवे दिसंबर से पहले नियमित ट्रेनों का संचालन करेगा। इसकी कम उम्मीद है।
रेलवे ने कोरोना महामारी के चलते 23 मार्च से नियमित ट्रेनों का संचालन बंद कर रखा है। शुरूआत में 12 मई से 15 जोड़ी राजधानी एक्सप्रेस और फिर एक जून से सौ जोड़ी ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चलाया गया। तीन सितंबर व 12 सितंबर से स्पेशल ट्रेनों की संख्या और बढ़ा दी गई। इस समय झांसी से होकर अप और डाउन की 50 ट्रेनें गुजर रहीं हैं। ये सभी ट्रेनें हैैैं तो नियमित, लेकिन इनके नंबर के आगे का एक हटाकर उसकी जगह शून्य लगाकर उनको स्पेशल बनाकर चलाया जा रहा है। स्पेशल ट्रेन बनाकर चलाने में रेलवे को कई फायदे हैं। जैसे कि सुपरफास्ट के तौर पर तीस से चालीस रुपये अतिरिक्त किराया वसूला जाता है। जैसे कि पहले झांसी से दिल्ली तक स्लीपर कोच में किराया 245 रुपये लगता था जो अब 280 रुपये लग रहा है। दूसरा वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग आदि जैसी पात्रों को किराए में मिलने वाली छूट भी नहीं देनी पड़ती। एसी कोचों से चादर, कंबल, पर्दे की व्यवस्था को हटा दिया गया है। कैटरिंग की व्यवस्था भी नहीं है। सिर्फ पैक्ड खानपान की वस्तुएं बेची जा रहीं हैं।
ऑनलाइन दिखती हैं खाली सीटें
अगर आप रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर किसी भी ट्रेन का टिकट बनवाने जाएंगे तो अधिकांश गाड़ियों में वेटिंग ही दिखाई देगी। मगर आप ऑनलाइन टिकट बनवाते हैं तो खाली सीटों का पता लग जाएगा। ऐसे में आपको वेटिंग की जगह तुरंत कंफर्म टिकट मिल जाएगा।