झांसी। बदले राजनीतिक माहौल में समाजवादी पार्टी टिकटों में फेरबदल कर सकती है। ऐसी संभावना को भांप कर दावेदार फिर सक्रिय हो गए हैं। लखनऊ और दिल्ली में बैठे अपने आकाओं की परिक्रमा शुरू कर दी है। कुछ नेता पाला बदलने की फिराक में हैं तो कुछ दोनों गुटों की तरफ ताक रहे हैं। पार्टी के नेता दो धड़ों में बंटे हैं। अखिलेखवादी नेताओं के इस्तीफे का सिलसिला जारी है।
समाजवादी पार्टी में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव से मंत्रालय छीने और इसके तुरंत बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश से प्रदेश अध्यक्ष का पद छीनते हुए इस पद पर शिवपाल सिंह यादव की ताजपोशी कर दी। शिवपाल ने कुर्सी संभालते ही अखिलेश के करीबियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में मची इस उठापटक का असर स्थानीय स्तर पर भी नजर आने लगा है। अपने को अखिलेशवादी कहते हुए मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रतिपाल सिंह यादव समेत कई नेता इस्तीफा दे चुके हैं।
पार्टी अखिलेश और शिवपाल के खेमों में बंटी नजर आ रही है। इसी के साथ टिकटों में फेरबदल के कयास भी शुरू हो गए हैं। बबीना से श्याम सुंदर सिंह और झांसी से दीपमाला कुशवाहा को सपा ने विधानसभा के लिए प्रत्याशी घोषित किया है। इनके टिकट की घोषणा शिवपाल सिंह यादव ने उस वक्त की थी, जब वह सपा के प्रदेश अध्यक्ष नहीं थे।
अब हालात बदले हैं। माना जा रहा है कि टिकट वितरण में अखिलेश यादव की भी चलेगी। यही कारण है कि अखिलेश गुट से जुडे़ स्थानीय नेता टिकट के लिए एक बार फिर से हाथपैर
मार रहे हैं। वे खुद और अपने करीबी नेताओं के जरिए हाईकमान तक दावेदारी पहुंचा रहे हैं। एक बार फिर सपा की स्थानीय राजनीति गरमाई है। हर नेता एक दूसरे को शक की नजर से देख रहा है। नेता बयानबाजी से बच रहे हैं। वे तेल और तेल की धार देख रहे हैं। झांसी की चारों पर सीटों पर प्रत्याशी तय कर दिए हैं। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि प्रत्याशी बदले जाएंगे या फिर इन्हीं पर दांव आजमाया जाएगा। इन सबके बीच चुनाव की तैयारी प्रभावित है। अभी तक जिला कमेटी भी नहीं बनी है।
टिकटों में फेरबदल पर नो कमेंट
टिकट के फेलबदल पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। यह फैसला तो पार्टी हाईकमान करेगा। लोग क्या कह रहे हैं, मुझे इससे कोई वास्ता नहीं है। मेरा फोकस तो विधानसभा चुनाव की तैयारी है और इसके लिए सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट हैं। चुनाव की घोषणा के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा। इस बार फिर पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा।
- छत्रपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष - सपा
संभावना से इनकार नहीं
टिकटों में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। समय, दूसरे दलों की रणनीति और परिस्थिति को देखकर टिकट तय होते हैं। चुनाव की घोषणा के बाद बाद तब के हालात दो देखकर टिकट तय किए जा सकते हैं। हाईकमान सर्वोपरि है। उसका फैसला हम सभी नेता और कार्यकर्ता मानेंगे। हमारा तो जोर है कि विधानसभा चुनाव में सपा को फिर बहुमत दिलाने पर।
सुदेश पटेल
पूर्व जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी