शहर में बनेगा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल
झांसी। दुपहिया वाहन चलाना सीखना हो या चौपहिया, आने वाले दिनों में इसके लिए यहां-वहां नहीं भटकना होगा। शहर में परिवहन विभाग मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खोलने जा रहा है, जिसमें छोटे बड़े सभी वाहनों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका निर्माण राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के परिसर में होगा। इसके लिए शासन की ओर से 2.37 करोड़ रुपये की पहली किस्त आवंटित कर दी गई है।
जिले में तेरह निजी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित हैं। लेकिन, इनमें से ज्यादातर के पास ड्राइविंग सिखाने के लिए अपना कोई निजी स्थान नहीं है। शहर के मैदानों व सड़कों पर ही ये लोगों को गाड़ियां चलाना सिखाते हैं। इससे प्रशिक्षण तो पूरा हो जाता है, परंतु चालक ड्राइविंग की बारीकियों से वंचित रह जाते हैं। अब ये स्थिति ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। शहर में सरकारी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुलने जा रहा है। इसके लिए आईटीआई की पांच एकड़ भूमि ली गई है। ये जमीन परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। इसके निर्माण पर चार करोड़ पचहत्तर लाख पंचानवे हजार रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। इसमें से दो करोड़ सैंतीस लाख रुपये की रकम शासन ने उपलब्ध करा दी है। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है। दिसंबर 2020 तक काम पूरा करने की अवधि निर्धारित की गई है।
भारी वाहनों का भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में दुपहिया व चौपहिया वाहनों के साथ बस, ट्रक जैसे भारी वाहन भी चलाना सिखाएं जाएंगे। इसके लिए यहां तीन अलग-अलग ट्रैक बनाए जाएंगे। इसके अलावा सिग्नल लाइट, संकेतकों की पहचान भी कराई जाएगी। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा होगी, इसके बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
समझाए जाएंगे पार्किंग के भी तरीके
मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में केवल गाड़ी चलाना ही नहीं सिखाई जाएगी, बल्कि उसे पार्क करने का ढंग भी बताया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ज्यादातर स्थानों पर पार्किंग की निर्धारित व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में बेतरतीब गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में ट्रेनिंग स्कूल में वाहन के पार्किंग की जगह का चयन कर उसे तरीके से खड़े करने के विषय में प्रशिक्षित किया जाएगा।
परीक्षा पास करने के बाद जारी होगा लाइसेंस
मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रशिक्षणार्थियों का टेस्ट लिया जाएगा। इसमें पास होने पर स्कूल की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इस प्रमाण पत्र के आधार पर ही परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस जारी करेगा। बगैर इसके लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आने वाले लोगों का संभागीय परिवहन कार्यालय में परीक्षण किया जाता है। उनसे ‘8’ आकार के ट्रैक पर गाड़ी चलवाई जाती है। ये ट्रैक बेहद छोटा है, जिससे ये परीक्षण औपचारिक होकर रह जाता है।
ज्यादातर लोग गाड़ी चलाना तो जानते हैं, परंतु उन्हें ड्राइविंग की बारीक जानकारियां नहीं होती हैं। दुर्घटनाओं के कारणों में से ये भी एक बड़ा कारण है। लेकिन, ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण लेने वालों को वाहन चलाने से लेकर सड़क सुरक्षा तक की सभी जानकारियां दी जाएंगी। इसके बाद ही उनका लाइसेंस जारी होगा। ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना को लेकर शासन का रुख गंभीर है।
- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी