आने वाले दिनों में रेल प्रशासन कुछ ट्रेनों को संचालन निरस्त कर सकता है। कोहरे के कारण बिगड़ी रेल की चाल को पटरी पर लाने के लिए यह तैयारी की जा रही है। कोहरे के कारण ट्रेनें पटरी पर रेंग रही हैं, जिससे दिल्ली और कानपुर की तरफ से आने वाली गाड़ियां दो से 13 घंटे लेट चल रही हैं। रेलवे ने दुर्घटनाओं से बचने के लिए ड्राइवरों पर भी दस घंटे से अधिक रेल न चलवाने का निर्णय लिया है।
रेल प्रशासन के लिए कोहरे में (पंद्रह दिसंबर से इकतीस जनवरी तक) ट्रेनों का संचालन चुनौती बन जाता है। मगर, इस बार कोहरा एक दिसंबर से ही पड़ना शुरू हो गया। चालक की जरा सी भूल सैकड़ों यात्रियों का काल बन सकती है। कोहरे में अधिकांश ट्रेन दुर्घटनाएं रनिंग स्टाफ से अधिक काम लेने से होती हैं। रेल मंडल में कोहरे की सबसे अधिक मार झांसी-दिल्ली सेक्शन में झेलनी पड़ती है। आम दिनों में रनिंग स्टाफ को झांसी से नई दिल्ली सवारी गाड़ी ले जाने में छह से आठ घंटे का समय लगता है।
जबकि, कोहरे में यही दूरी तय करने में पंद्रह से अठारह घंटे लग जाते हैं। दस घंटे बाद चालक दल को एक-एक मिनट गुजारना भारी पड़ता है। ऐसे में वह सेक्शन खाली देख ट्रेन को दौड़ाना शुरू कर देते हैं। यही गलती अक्सर रेल दुर्घटना का कारण बन जाती है।
गौरतलब है कि विगत 20 नवंबर को तड़के पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे के बाद रेल प्रशासन हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रहा है।
दिल्ली नहीं, आगरा तक जाएगा रनिंग स्टाफ
रेलवे बोर्ड ने इस बार साफ निर्देश दिए हैं कि ड्राइवर कोहरे में दस घंटे से अधिक ट्रेन नहीं चलाएगा। ऐसी स्थिति में रनिंग स्टाफ से दिल्ली की जगह आगरा तक ट्रेनें चलवायी जाएंगी। आगरा से दूसरा स्टाफ दिल्ली तक ट्रेन लेकर जाएगा। ऐसे में स्टाफ की कमी तय है। इस कारण रेल प्रशासन कोहरे में बीस प्रतिशत ट्रेनों को रद करने की तैयारियां कर रहा है। इसके अलावा स्पेशल ड्यूटी में लगे स्टाफ को भी लाइन पर चलाया जाएगा। पंद्रह दिसंबर के पहले रनिंग स्टाफ के मेडिकल ड्यूज व अन्य प्रशिक्षण भी पूरे कराने के निर्देश दिए गए हैं।
‘कोहरे में ट्रेनों के संचालन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। रेल प्रशासन स्थितियों के हिसाब से ही ट्रेनों के संचालन पर निर्णय ले रहा है।’
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी रेल मंडल।