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एसटीएफ की सटीक जानकारी पर दबोचे गए सॉल्वर, पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस ने भेजा जेल

Tue, 08 Jan 2019 02:13 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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solver Gang - फोटो : फाइल फोटो
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एसटीएफ की सटीक जानकारी के बाद हरकत में आई पुलिस ने सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में तीन सॉल्वरों को पकड़ा था। फरार चल रहे दो आरोपी अभी तक पुलिस के हाथ नहीं आ सके हैं। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। पकड़े गए आरोपी पहले भी कई परीक्षाओं में सॉल्वर बैठा चुके हैं। जिसके एवज में लंबी रकम भी वसूल की जाती थी। आधी रकम काम होने से पहले और बकाया राशि काम होने के बाद दी जाती थी। 

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जिले में रविवार को सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा संपन्न होने के बाद पकड़े गए सॉल्वरों की जड़ें लखनऊ से लेकर बड़े महानगरों में भी जमीं हुई हैं। रविवार को 27 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई थी। परीक्षा के दौरान एसटीएफ ने कई जिलों में दबिश देकर सॉल्वरों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला था कि झांसी में भी एक परीक्षा केंद्र पर सॉल्वर ने परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा दी है। एसटीएफ की सूचना एसएसपी डॉ. ओपी सिंह को मिलने के बाद पुलिस महकमा अलर्ट हो गया था। 

एसएसपी के निर्देश पर स्वॉट टीम प्रभारी विजय कुमार पांडेय व सीपरी बाजार प्रभारी निरीक्षक सभाजीत मिश्रा ने पड़ताल कर मिशन कंपाउंड के एचएम मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज के पास दबिश देकर इलाहाबाद के थाना घूरपुर गांव दौना व हाल निवासी थाना मोंठ के मोहल्ला मदारगंज निवासी उमाशंकर पटेल, प्राचीन कुमार और मातन मोहल्ला निवासी पंकज वाल्मीकि को पकड़ा था। जहां थाने लाकर देर रात की गई पूछताछ में पता चला था कि तीनों सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में सॉल्वर काम करते हैं। 
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परीक्षार्थी थाना एरच के गांव गोती निवासी संजय यादव के स्थान पर मनीष मिश्रा परीक्षा देकर बकाया रकम लेने के लिए निकल गया था। तीनों लोग घर न जाकर लखनऊ जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने तीनों को दबोच लिया। पुलिस ने उनके पास से प्रवेश पत्र, ओएमआर आंसर सीट, मूल प्रश्न पुस्तिका, मोबाइल व आईडी बरामद की है। 

पकड़े गए आरोपियों में उमाशंकर मोंठ के आदर्श इंटर कॉलेज में हिंदी का अध्यापक भी है। प्राचीन व पंकज से उमाशंकर की अच्छी दोस्ती भी है। मनीष मिश्रा लखनऊ तरफ का रहने वाला बताया जा रहा है। मोंठ में मनीष मिश्रा की रिश्तेदारी भी बताई जा रही है। यहां आने-जाने के दौरान तीनों से दोस्ती हो गई। उमाशंकर में काबिलियत का फायदा उठाते हुए उसे सब्ज बाग दिखाए, जिसमें प्राचीन व पंकज भी शामिल हो गए। पता चला है कि मनीष मिश्रा पूरे धंधे का मास्टरमाइंड है। लखनऊ, इलाहाबाद व अन्य महानगरों में सॉल्वर गैंग से तार जुड़े हैं। यह गैंग का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। सॉल्वर बैठाने से पहले अभ्यर्थी को मनीष मिश्रा से मिलाया जाता था, जिसके बाद उसकी हैसियत का भी यह गैंग के सदस्य पता लगाते थे, उसके बाद रकम के रेट तय होते थे। अभ्यर्थी यदि पैसे वाला हुआ तो आठ लाख से कम सौदा नहीं होता था। यदि उसकी माली हालत अच्छी नहीं रही तो पांच लाख तो देना ही पड़ते थे। बात बनने के बाद आधी रकम पहले और आधी रकम काम होने के बाद तय होती थी। 

सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा की तैयारी करते समय अभ्यर्थी संजय की मुलाकात तीनों से हुई थी, जहां तीनों ने उनको फंसा लिया था। इसके बाद संजय ने दो लाख रुपये भी नगद दे दिए थे। बकाया रकम के लिए परीक्षा छूटने के बाद बात हो गई थी। मनीष मिश्रा लेनदेन की बात करने के लिए संजय को अपने साथ लेकर चला गया था। पकड़े गए तीनों आरोपी भी लखनऊ जाने की तैयारी में थे और जाने से पहले पुलिस के हाथ आ गए। पुलिस ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।

और सॉल्वर तो नहीं बैठा दिए
एसटीएफ की सूचना आने के बाद पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि एक ही सॉल्वर बैठाया गया था। सूत्रों से पता चला है कि कुछ और परीक्षाथियों के स्थान पर भी सॉल्वर बैठाए गए थे, हालांकि पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर सकी। एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि इस मामले की भी जांच की जा रही है। फरार चल रहे आरोपी मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के बाद ही जानकारी मिलेगी। 

प्राचीन फोटो बदलने में है माहिर
गैंग में सबसे महत्वपूर्ण कार्य प्राचीन के पास था। जो स्टूडियो में फर्जी आईडी व मिक्सिंग कर फर्जी प्रवेश पत्र तैयार कराता था। फिर सॉल्वर को संबंधित जिले में भेजा जाता था। फोटो मिक्स करके दोनों चेहरों से मिलती जुलती फोटो तैयार की जाती थी। पता चला है कि प्राचीन अन्य सॉल्वर से लेकर अभ्यर्थियों की फोटो की भी अदला बदली कर चुका है। 

सोशल मीडिया का ले रहे थे सहारा
पता चला है कि सहायक भर्ती परीक्षा समेत और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बना बिठाने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे थे। इसके लिए बाकायदा सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती कर पढ़ाई की जानकारी ली थी। इसके बाद दोस्ती कर मोबाइल नंबर हासिल कर उनको पूरी जानकारी देते थे। सूत्रों से पता चला है कि कई परीक्षाओं में सॉल्वर बैठा चुके हैं, जिसकी पुलिस जांच कर रही है। हालांकि, इसकी पूरी जानकारी मनीष मिश्रा के पास है। 

सॉल्वर के रेट भी थे फिक्स
एसटीएफ ने जिन सॉल्वरों को पकड़ा वे पुराने सॉल्वरों को दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने के 80 हजार से एक लाख रुपये दिलवाते थे। इसके एवज में वे पांच से आठ रुपये वसूल करते थे। सॉल्वर को रकम देने के बाद आपस में हिस्सा बांट किया जाता था। जबकि कुछ रकम ऊपर बैठे गैंग के अन्य सदस्यों तक भी पहुंचती थी। 

कोचिंगों के पास थे सक्रिय
महानगर की कई कोचिंग सेंटरों के पास गिरोह के सदस्य डेरा जमाए रहते थे। शहर में इंजीनियरिंग, मेडिकल, सिविल, बैंकिंग, टीईटी समेत अन्य परीक्षाओं की कोचिंग हैं। यहां शहर के अलावा आसपास के जिलों के छात्र पढ़ने आते हैं। गैंग के सदस्य इन्हीं कोचिंग के आसपास सक्रिय रहते हैं। पता चला है कि कुछ कोचिंग संचालक के गैंग के सदस्यों से संबंध थे। 

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