स्मार्ट सिटी की राह में पिछड़ गई झांसी
झांसी। स्मार्ट सिटी के सपने को रैकिंग ने बड़ा झटका दिया है। शहरी विकास मंत्रालय की रैंकिंग में झांसी पिछड़कर 60 वें पायदान पर आ गई है। तमाम प्रोजेक्ट अधूरे रहने और बजट का पूर्ण उपयोग नहीं होने के चलते रैकिंग में गिरावट आई है। अफसरों की अनदेखी भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
शहरी विकास मंत्रालय ने देश के 100 शहरों की रैकिंग जारी की। इसमें झांसी 181.74 अंक पाकर 60वें स्थान पर रही। जबकि फरवरी 2019 में जारी की गई रैकिंग में झांसी 72.84 अंक पाकर प्रदेश में पहले और देश में नौवें पायदान पर रही थी।
मंत्रालय यह रैकिंग टेंडर निकाले जाने, वर्क ऑर्डर जारी होने, कार्य पूर्ण होने और बजट के उपयोग के आधार पर जारी करता है। महानगर की बात करें, तो स्मार्ट सिटी के तमाम काम अब तक अधूरे पड़े हैं। स्मार्ट सड़क का निर्माण, सोलर प्लांट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ट्रैफिक की मॉनीटरिंग, प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, अरबन हाट रिटेल स्टोर, प्रदर्शनी सेंटर, मोनो रेल, रोप वे, स्मार्ट वेंडिंग जोन समेत तमाम प्रोजेक्ट पर अब तक अमल नहीं किया जा सका है। ऐसे में स्मार्ट सिटी महज सपना बनकर रह गई है।
करोड़ों का बजट खाते में डंप
स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र सरकार की ओर से झांसी को 96 करोड़ रुपये का बजट मिल चुका है, लेकिन अब तक महज 10 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। इसके चलते झांसी की रैकिंग में गिरावट आई है।
स्मार्ट सिटी के तहत काम चल रहे हैं। कई कामों के टेंडर निकाले गए हैं। काम पूरे होने के बाद फिर से महानगर की रैंकिंग में उछाल आएगा।
अरुण गुप्ता, अपर नगर आयुक्त