झांसी। नगर निगम की नजरों में झांसी में एक भी पशु वधशाला नहीं है। यह बात का खुलासा निगम ने प्रदेश की विधान परिषद को भेजी रिपोर्ट में किया है। बावजूद नगर में धड़ल्ले से पशुओं की कटान जारी है। मांस खुलेआम बाजारों में बेचा जा रहा है। जबकि, आधुनिक पशु वधशाला की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
विधान परिषद के द्वितीय सत्र में सदस्य सुरेश कुमार त्रिपाठी द्वारा उठाए गए प्रश्न में नगर विकास मंत्री से झांसी व चित्रकूट मंडल में अनुमति प्राप्त पशु वधशालाओं की संख्या मांगी थी। जवाब में नगर निगम ने बताया है कि झांसी में अनुमति प्राप्त कोई भी वधशाला नहीं है। पूर्व में नगर की एक पशु वधशाला को उच्च न्यायालय के आदेश पर बंद कराया जा चुका है। जबकि, यह नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 114 में अनिवार्य कर्तव्यों में पशु वधशाला की व्यवस्था का प्रावधान है। जबकि, हकीकत इससे इतर है।
नगर में पशुओं की कटान धड़ल्ले से जारी है। बाजारों में खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है। इस पर अंकुश लगाने के लिए पूर्व में नगर में आधुनिक पशु वधशाला बनाने की योजना भी बनाई थी। लेकिन, क्षेत्रीय सांसद /केंद्रीय मंत्री उमा भारती के विरोध के चलते यह ठंडे बस्ते में चली गई है। जबकि, निगम ने इसे जरूरी भी बताया था। नगर निगम ने रिपोर्ट में कहा था कि पशु वध का कार्य कसाई मंडी वार्ड क्रमांक 33 में गतिमान है। इस कारण अस्वच्छ एवं अनहाईजैनिक मीट की आपूर्ति शहर में हो रही है। उपर्युक्त कारणों से नगरवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। झांसी में आधुनिक पशु वधशाला का निर्माण कराया जाना जन स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित एवं आवश्यक है।