क्षेत्र में लगातार रुक रुक हो रही बारिश के कारण नदी व नाले उफान पर हैं। बुधवार की रात माताटीला बांध से छोड़े गए पानी के कारण अचानक बेतवा व जामनी नदी का जल स्तर बढ़ गया तथा इन नदियों के बीच टापुओं पर जानवर चराने गए छह चरवाहे पानी के बीच फंस गए। मड़ोर गांव के पास घुरारी व बेतवा नदी के टापू पर फंसे तीन चरवाहों को जहां मध्यप्रदेश टूरिज्म की राफ्टिंग टीम ने रेस्क्यू कर कड़ी मशक्कत के बाद चौदह घंटे बाद सकुशल निकाल लिया जबकि पृथ्वीपुर के सुनौनिया गांव के पास बेतवा व जामनी नदी के बीच टापू पर फंसे तीन चरवाहों को जिला प्रशासन कड़ी मशक्कत के बाद भी जब निकालने में नाकाम रहा तो ग्वालियर से वायुसेना का विमान मंगवाया। इसके बाद एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर द्वारा उन्हें 24 घंटे बाद सकुशल निकाला गया।
जानकारी के अनुसार पृथ्वीपुर तहसील के सिनोनिया गांव के निवासी तीन ग्रामीण अपनी भैंसे चराने बेतवा व जामनी नदी के बीच स्थित टापू पर गए हुए थे। इसी दौरान अचानक जल स्तर बढ़ने से यह पानी से घिर गए। जिला प्रशासन को सूचना मिलने पर इन्हें निकालने का प्रयास किया गया पर सारी कोशिशें नाकाम रहीं। बाद में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने ग्वालियर की भारतीय वायुसेना को सूचना देकर मदद मांगी।
दोपहर में मौके पर पहुंचे वायु सेना के हैलीकॉप्टर की मदद से सेना के जवानों ने रेस्क्यू कर पिछले चौबीस घंटे से फंसे तीनों चरवाहों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू कर निकाले गए सिनोनिया गाँव के निवासी कालीचरणए करण सिंह और ठाकुर दास ने बताया कि पिछले चौबीस घंटे तक वे पानी पीकर व जंगली फल खाकर ही अपनी भूख मिटाते रहे। मूसलाधार बारिश के कारण बांधो से छोड़े गए पानी ने नदियों में उफ ान ला दिया हैए इसके चलते अपने रोजमर्रा के काम के लिए नदी के आसपास जाने वाले लोग टापुओं पर फं स जा रहे हैंए इस इस कारण प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
एक अन्य घटना में मड़ोर गांव के निवासी चरवाहे जगदीश पालए गंगा राम केवट व राजेश केवट बुधवार की सुबह बेतवा नदी के घाट पर अपनी 40 बकरियों को चराने ले गए थेए जब वह बेतवा व घुरारी नदी के बीच टापू पर थे कि इसी दौरान अचानक बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया। एक तरफ बेतवा व दूसरी ओर घुरारी नदी का जल स्तर बढ़ने से यह चरवाहे टापू पर फं सकर रह गए। जब यह घर नहीं पहुंचे तो ग्रामीणों ने घटना की सूचना प्रशासन को दी। तहसीलदार रोहित वर्मा व नरेंद्र त्रिपाठी टीआई पुलिस बल के साथ मौके के लिए रवाना हुएए लेकिन रास्ते में पड़ने वाले नाले के उफान पर होने के कारण प्रशासन की टीम को बीच में ही रुकना पड़ा।
आनन-फानन में इसकी सूचना मध्यप्रदेश पर्यटन की राफ्टिंग टीम को दी गई तथा उसने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। चौदह घंटे से पानी के बीच फंसे लोगों को निकालने की योजना बनाई गई। इस बात का विशेष ख्याल रखा गया कि राफ्ट को सुरक्षित स्थान से ले जाया जाए ताकि लहरों के बीच पत्थरों से टकराकर क्षतिग्रस्त न हो जाए। मध्यप्रदेश पर्यटन के प्रबंधक संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में राफ्टिंग टीम ने तीन घंटे के रेस्कयू के बाद तीनों ग्रामीणों को सकुशल पानी के बीच से बाहर निकाल लिया। पानी का तेज बहाव होने के कारण चालीस में से कुछ बकरियां नदी में बह गई हैं। चरवाहे अपने रोजगार के एक मात्र साधन बकरियों से हाथ धोने के कारण काफी दुखी हैं।
यह रहे शामिल राफ्टिंग टीम में
राफ्टिंग टीम में पुष्पेंद्र केवटए लक्ष्मी प्रजापतिए मनोहर केवटए राजेंद्र परिहारए मुकेश केवट शामिल रहे। एमबीए टूरिज्म छात्र मनोहर लाल केवट ओरछा निवासी हैं। इन्होंने महाराष्ट्र से रेस्क्यू ऑपरेशन का कोर्स किया है। आईटीएचएम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुनील काबिया ने बताया कि प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय का भी सहयोग रहा है। इनके पास एमपी टूरिज्म से राफ्ट का लाइसेंस है।
प्रशासन के अलर्ट के बाद भी नहीं मानते चरवाहे
हर साल एक दर्जन से अधिक चरवाहे बेतवा व जामनी नदी के टापुओं पर फंस जाते हैं तथा इन्हें रेस्क्यू करके निकाला जाता है। जबकिए प्रशासन बांधों से पानी छोड़ने से पहले ही एनाउंस करवाकर नदी के पार न जाने की चेतावनी भी देता है पर इसका गांव के लोगों पर कोई असर नहीं होता हैै। बीते वर्ष भी जामनी व बेतवा नदी के टापू पर लोटना गांव के पास लोग पानी से घिर गए थेए जिन्हें प्रशासन ने निकाला था।