झांसी। देश की आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई में झांसी के क्रांतिवीरों में सीताराम भास्कर भागवत का भी अहम स्थान है। देश के महान सपूत क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के वह सबसे विश्वास पात्र रहे थे। सीताराम भागवत ने नमक सत्याग्रह सहित कई राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल भी गए।
हमीरपुर के श्रीनगर में महाराष्ट्रीय परिवार में जन्मे सीताराम भागवत ने 1930 में ओपारा में नमक सत्याग्रह के दूसरे जत्थे का नेतृत्व किया था। ऐसे में उन्हें छह माह की सजा मिली। भारत छोड़ो आंदोलन में 11 मैनेजर बंद रहे। देश की आजादी के आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण में कई बार जेल जाना पड़ा। देश की युवा पीढ़ी सचेत हो और शारीरिक रूप से मजबूत हो ऐसे में 1923 में उन्होंने पंचकुइया क्षेत्र में महाराष्ट्र अखाड़े की स्थापना की। इसके साथ ही अन्य संस्थाओं के गठन में भी अहम
योगदान दिया। क्रांतिवीर चंद्रशेखर आजाद से इनकी काफी निकटता थी। आजाद नगर स्थित इनके घर पर कई बार आए और क्रांतिकारी गतिविधियों में लोगों को शामिल करने के लिए प्रेरित करते थे। सीताराम भागवत ने आजीवन खादी वस्त्रों को बढ़ावा दिया और स्वयं उसे पहनते थे। वह स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को लेकर हमेशा लोगों को जागरूक करते रहे।