मेरे पति एक थाने में सिपाही हैं और अपने ऊपर अनाप-शनाप खर्चा करते हैं। रुपये मांगने पर आनाकानी करते हैं। घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बताया जाए कि पति की सैलरी कितनी है। कई महिलाओं ने पुलिस विभाग में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी है।
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लोग परिवार का सच जानने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। एक साल में आठ सौ से अधिक लोगों ने अलग-अलग तरीके की सूचनाएं मांगी हैं। इनमें 61 पुलिसवालों की पत्नियों ने पतियों की सैलरी की सूचना मांगी है। पूछा है कि उनके पति को कितनी सैलरी मिलती है और कितना प्रोविडेंट फंड (पीएफ) कटता है। यदि बैंक का लोन चल रहा है तो कितना कट रहा है। पुलिस विभाग में कई तरह की सूचनाएं मांगी जा रही हैं। जांच के बाद ही नियमानुसार सूचना उपलब्ध कराई जा रही है।
यह सूचनाएं भी मांगीं
- मेरे पति ने एक साल में कितनी छुट्टियां लीं और उनकी कितनी बाकी हैं।
- मेरे पति का ड्यूटी टाइम कितना है और वह कितने घंटे काम करते हैं।
- बेटी के रिश्ते के लिए पुलिस में कार्यरत योग्य कुंवारों का प्रोफाइल भी मांगा।
पड़ताल के बाद दी जाती है सूचना
इस तरह के मामलों में सूचना देने से पहले पड़ताल की जाती है। पड़ताल के बाद अधिकांश लोगों को सूचनाएं देने से इंकार कर दिया गया। कुछ लोगों ने निजी जानकारी मांगी थी, लेकिन सूचना मांगने वालों का नाम व पता स्पष्ट नहीं हो सका, इसके चलते उनको सूचना देने से मना कर दिया गया। जबकि अन्य की फाइलें चल रही हैं।
केस 1
- एक महिला के पति कार्यालय में दरोगा है। पति से विवाद चल रहा है। पत्नी ने पूछा है कि सैलरी कितनी है और किस बैंक में आती है।
केस 2
- रिटायर्ड पुलिसकर्मी की पत्नी ने पूछा कि उनके पति रिटायर्ड हो चुके हैं। कितनी सैलरी मिलती थी और अब कितनी पेंशन मिल रही है।
केस 3
- मेरे पति ने कितनी सर्विस पूरी कर ली है और कितनी सैलरी अब तक वह ले चुके हैं। उन पर बैंक का कितना बकाया है।
केस 4
- एक महिला ने सूचना मांगी है कि उनके पति की सर्विस बुक पर नॉमिनी में किसका नाम है। नौकरी के दौरान नाम तो नहीं बदलवाया गया।
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत परिवार से लेकर कई तरह की सूचनाएं मांगी जाती हैं। इनमें देखा जाता है कि कौन सी सूचना देय है और कौन नहीं। नियमानुसार ही सूचना उपलब्ध कराई जाती है।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी