जब सच्चे प्यार के सामने बौनी पड़ गईं मजहब की दीवारें
ओमप्रकाश दुबे
झांसी। बुंदेलखंड की पवित्र प्रेम कथाओं में एक ऐसी भी कहानी है जिसमें मुगल शहजादी बद्र-उन-निसा ने अपने प्रेमी बुंदेला राजघराने के राजकुमार के पवित्र प्रेम के लिए अपने ही पिता की सेना के सामने तलवार उठा ली थी। एक तरफ मंदिर तोड़ने के लिए औरंगजेब की सेना खड़ी थी तो दूसरी ओर शहजादी अपने प्रेमी सुंदर सिंह के साथ मंदिर के गर्भगृह की रक्षा करने के लिए अपना जीवन तक न्योछावर करने को तैयार थी। हारकर सेना को वापस जाना पड़ा और ओरछा के चतुर्भुज मंदिर का गर्भगृह सुरक्षित बच गया।
इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार के पंजीकृत गाइड मोहित त्रिवेदी बताते हैं कि इस कहानी का जहां अनेक पुस्तकों में उल्लेख है तो वहीं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ओरछा में चलाए जाने वाले लाइट एंड साउंड शो में भी इसे सिलसिलेवार तरीके से दिखाया जाता है। त्रिवेदी ने बताया कि यह बात है उस समय की जब हिंदुस्तान के तख्त पर बादशाह औरंगजेब थे। उनकी शहजादी बद्र-उन-निसा जहां युद्ध कला कौशल में निपुण थीं, वहीं उनके दरबार के कामकाज में भी हाथ बंटाती थीं। बेटी की कार्यकुशलता से औरंगजेब इस कदर प्रभावित था कि उन्होंने बुंदेलखंड की रियासतों की मनसबदारी का काम भी शहजादी को ही सौंप रखा था, इसके चलते बद्र-उन-निसा का बुंदेलखंड की रियासतों में आना जाना होता रहता था। दरबार के दौरों के लिए आते जाते समय शिकार की शौकीन मुगल शहजादी का जंगलों में शिकार के लिए जाने आने में ओरछा राज्य के राजकुमार सुंदर सिंह से प्यार हो गया।
इतना ही नहीं, शहजादी दूसरी रियासतों के दौरे करने के बाद ओरछा के धार्मिक समारोहों में भी वेष बदलकर सुंदर सिंह के साथ हिस्सा लेती थीं। उधर, बद्र-उन-निसा के पिता औरंगजेब ने हिंदू मंदिरों को तोड़ने का फरमान जारी कर सैनिकों की टुकड़ियां भेजकर कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था। ओरछा में राम जन्मोत्सव के बाद चतुर्भुज मंदिर के अंदर झूला उत्सव चल रहा था। भगवान की शयन आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया जा रहा था कि इसी दौरान एक बुंदेली सैनिक ने हांफते हुए मंदिर के पुजारी प्राणनाथ को बताया कि मुगल सैनिकों की टुकड़ी ओरछा में प्रवेश कर चुकी है। पलक झपकते ही मुगल सैनिकों ने मंदिर को चारों ओर से घेर लिया। पुजारी प्राणनाथ ने मुख्यद्वार बंद कर दिया तो सैनिकों ने मंदिर के ऊपर चढ़कर बाएं तरफ के गुंबद को क्षतिग्रस्त कर दिया। कुछ सैनिक मुख्य द्वार को तोड़कर मंदिर के अंदर प्रवेश कर गए। भक्तों में हाहाकार मच गया। मुगल सैनिक गर्भगृह की ओर बढ़ पाते इसके पहले ही भीड़ को चीरते हुए सैनिक के वेष में एक किशोर सा दिखने वाला योद्धा मुगल सैनिकों की टुकड़ी के सामने आकर खड़ा हो गया, उसने म्यान से तलवार खींचकर सैनिकों को वापस जाने के लिए ललकारा, दोनों ओर से तलवारें चलने लगीं, इसी दौरान एक झटके के साथ इस किशोर योद्धा के सिर का साफा खुलकर नीचे आ गिरा तथा बड़े -बड़े बाल बिखर गए।
लोग यह देखकर दंग रह गए कि वह किशोर नहीं बल्कि किशोरी थी। मुगल सेनापति की आंखें फटी की फटी रह गईं, सामने कोई साधारण लड़की नहीं औरंगजेब की शहजादी बद्र-उन निसा खड़ी थी। सेनापति ने बड़े ही विनम्र स्वर में कहा, इस मंदिर के गर्भगृह को ध्वस्त करने का फरमान आपके पिता औरंगजेब ने दिया है, पर शहजादी टस से मस नहीं हुई, उसने कहा गर्भगृह तक जाने के लिए उसकी लाश से गुजरना होगा और इस तरह औरंगजेब की सेना को मंदिर के गर्भगृह को नुकसान पहुंचाए बिना ही वापस जाना पड़ा। बुंदेला राजकुमार सुंदर सिंह अपनी प्रेमिका के इस सात्विक प्रेम को देख निहाल हो गए । इस संबंध में ओरछा निवासी संजय यादव बताते हैं बाद में औरंगजेब ने शहजादी बद्र-उन-निसा को जतारा के किले में कैद कर दिया था। काफी लंबे अरसे बाद उन्हें मुक्त किया था।