सिंधी समाज के रंगोत्सव में इस बार समाज की महिलाओं को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाएगा। अब तक इस आयोजन में महिलाओं को औपचारिक तौर बुलाया नहीं जाता था, हालांकि इनके आने पर रोक कभी नहीं रही है। सिंधी समाज में होलिका दहन को लेकर भी अनूठी परंपरा है, जिसे वह हर साल पूरी शिद्धत के साथ निभाते हैं।
शहर के पूज्य सिंधी पंचायत भवन में हर साल सिंधी समाज रंगोत्सव का आयोजन करता है। इस बार 14 मार्च को होने वाले इस आयोजन में पहली बार समाज की महिलाओं और लड़कियों को आमंत्रण दिया गया है। सिंधी समाज के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैनवानी ने बताया कि रंगोत्सव में रासलीला, हास्य कवि सम्मेलन और भंडारा होगा। सिंधी समाज में होलिका दहन की भी बड़ी रोचक और अनूठी परंपरा है। होली पूर्णिमा पर आटे व गुड़ से बनी मीठी रोटी, जिसे सिंधी समाज रोट कहते है, पर धागा लपेट कर इसे जलते गोबर के कंडे पर सेका जाता है। मीठी रोटी सिक जाती है और कंडा भी राख हो जाता है, लेकिन रोटी पर लिपटा धागा नहीं जलता है। इसे लेकर उनमें मान्यता है कि धागा प्रहलाद है और कंडा होलिका। होलिका जल जाती है और प्रहलाद बच जाते हैं।
मिठास घोलता है गियर
सिंधी समाज में होली पर मेहमानों के स्वागत के लिए खास पकवान गियर बनाया जाता है। यह मैदा और शक्कर की चाशनी से बनता है। जलेबी से कई गुना बड़े गियर के अलावा खोआ के मीठे समोसे और रसभरी गुझिया भी बनती है। सिंधी समाज में तीन दिन होली मनाई जाती है। होली पूर्णिमा के बाद परमा उन परिवारों के सदस्यों को समाज के सदस्य गुलाल का तिलक लगाते है, जिनके यहां किसी का हाल ही में निधन हुआ हो। गुलाल का तिलक लगने के बाद वह परिवार शुभ कार्य कर सकता है।