सिंचाई विभाग में 77.35 लाख के घपले के सभी नौ आरोपियों को पुलिस ने दी क्लीन चिट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सिंचाई विभाग में 77.35 लाख रुपये के घपले के सभी नौ आरोपियों को पुलिस ने क्लीन चिट थमा दी। सीजेएम कोर्ट में उसने क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर दी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत न मिलने का दावा करते हुए यह रिपोर्ट पेश की है। पुलिस के पहले इस मामले की जांच शासन स्तर पर गठित तकनीकी टीम कर चुकी। तकनीकी टीम ने घपले के आरोप सही पाए थे। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही शासन ने न सिर्फ तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया बल्कि सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन पुलिस इस मामले में कोई सुबूत नहीं ढूंढ सकी। इस क्लोजर रिपोर्ट के चलते पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार पर वर्ष 2019-20 की खरीफ सीजन में बिना नहरों की सफाई एवं मरम्मत कराए छह फर्मों के बीच 77.35 लाख की मोटी धनराशि बांटने के आरोप थे। आरोपी एक्सईएन ने बिना टेंडर और एग्रीमेंट कराए भुगतान भी कर दिया। अमर उजाला ने सबसे पहले इस घोटाले का पर्दाफाश किया। घपले की गूंज शासन तक पहुंची। तीन सदस्यीय तकनीकी कमेटी ने पूरे मामले की जांच की। तकनीकी जांच टीम ने घपले के आरोप सही पाए। शासन के निर्देश पर बेतवा प्रखंड एक्सईएन उमेश कुमार ने 26 नवंबर 20 को नवाबाद में आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी लेकिन, पुलिस काफी दिनों तक टालमटोल करती रही। आखिरकार 20 जनवरी को आरोपियों के खिलाफ धारा 406 एवं 409 के तहत मामला दर्ज किया। इसकी विवेचना सबइंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार को सौंपी गई।
विवेचक धर्मेंद्र कुमार ने करीब चालीस दिनों की विवेचना में तीन अलग-अलग तारीखों में सभी नौ आरोपियों के साक्ष्य न मिलने के आधार पर हटा दिए। इसे तस्करा जीडी में भी चढ़ा दिया। सबसे पहले 2 मार्च को अखिलेश तिवारी, रामनरेश तिवारी, रोहित माटा, जानकी प्रसाद गौतम एवं बाबू प्रसाद तिवारी के नाम विवेचना से बाहर किए गए। इसके बाद छह मार्च को सतीश प्रजापति, अजीत कुमार, इंद्रजीत सिंह के नाम बाहर किए गए। सबसे आखिरी में तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार, अभिषेक राठौर के नाम भी 24 मार्च को हटाकर विवेचना खत्म कर दी गई। विवेचना खत्म करके पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट भी पेश कर दी है। वहीं, पुलिस की इस क्लोजर रिपोर्ट को अधिशासी अभियंता उमेश कुमार ने चुनौती दी है।
इन नौ आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
- संजय कुमार तत्कालीन अधिशासी अभियंता
- अजीत कुमार कैशियर
- सतीश प्रजापति लेखाधिकारी
- इंद्रजीत सिंह मेसर्स कामाक्षी सप्लायर्स
- अभिषेक राठौर मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन
- अखिलेश कुमार तिवारी एवं रामनरेश तिवारी मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन
- रोहित माटा मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन
- जानकी प्रसाद मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज
- बाबूप्रसाद तिवारी मेसर्स बाबू प्रसाद तिवारी
इनसेट
55 दिन बाद दर्ज हुई थी रिपोर्ट, क्लोजर रिपोर्ट में लगे महज 41 दिन
एक तरफ योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की बात कह रही वहीं, पुलिस महकमे को इसकी रत्ती भर परवाह नहीं। लाखों रुपये के घपले के आरोपियों के खिलाफ सिंचाई विभाग के उपसचिव ने एफआईआर दर्ज कराने को कहा। एक्सईएन उमेश कुमार ने 26 नवंबर को थाना नवाबाद में तहरीर दी। सरकारी कार्य होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में ही पुलिस ने 55 दिन लगा दिए। 20 जनवरी को एफआईआर दर्ज की। वहीं, जब क्लोजर रिपोर्ट लगाने की बात आई तब पुलिस की तेजी देखते ही बनती है। पुलिस ने अप्रत्याशित तेजी दिखाते हुए महज 41 दिन के भीतर न सिर्फ नौ आरोपियों के बयान दर्ज कर लिए बल्कि रिपोर्ट भी न्यायालय के सामने पेश कर दी। मजे की बात यह कि जिन आरोपियों के बयान लिए जाने थे उनमें से चार झांसी से कई सौ किलोमीटर दूर के जनपदों में रहते हैं। पुलिस आरोपियों के खिलाफ सुबूत न मिलने की बात कही है जबकि सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम ने खुद अपनी जांच रिपोर्ट में घपले की पुष्टि की थी।
मालूम चला है कि पुलिस की ओर से क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई है। इसके खिलाफ अगली तारीख में रिव्यू दाखिल करेंगे। विभाग की ओर से सभी कागज दिखाए जाएंगे।
उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता
बेतवा प्रखंड,
इस मामले में अभी वादी को आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया जाएगा। वादी की सहमति के बिना क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय स्वीकार नहीं करेगा। वादी की आपत्तियां अगर जुनईन हुईं तब मामला फिर से चलेगा।
शमीम खान, अधिवक्ता
यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है। मेरे आने से पहले का मामला है। इस मामले को दिखवाया जाएगा। जरूरत पड़ेगी तब कार्रवाई भी होगी।
शिवहरि मीणा
एसएसपी