झांसी। सिंचाई विभाग ने कोरम के तहत तो बाढ़ राहत केंद्र आरंभ कर दिए लेकिन, हैरत की बात यह कि सूचना देने का यहां कोई माध्यम ही नहीं है। जिस फोन नंबर के सहारे बाढ़ राहत केंद्र आरंभ किया गया वह पिछले एक महीन से डेड पड़ा है। इसको देखते हुए आकस्मिक परिस्थितयों से निपटने का इंतजाम अफसर कितनी गंभीरता से कर रहे, इसे असानी से समझा जा सकता है।
झांसी से ही ललितपुर, झांसी के सभी बांधों की निगरानी होती है। इन बांधों में विशाल जलराशि एकत्रित की जाती है। यहां से छोड़ा गया पानी झांसी से होते हुए पूरे पूर्वी उप्र तक की नदियों तक पहुंचता है। ऐसे में मानसून आरंभ होते ही इन बांधों की निगरानी सख्त कर दी जाती है। 24 घंटे इन बांधों की निगरानी करने के लिए झांसी में केंद्रीय कंट्रोल रूम बनाया जाता है जहां से नियमित अंतराल पर इन बांधों की गेज का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। यहां से नापे गए गेज के माध्यम से ही सभी जगह
एलर्ट भेजे जाते हैं लेकिन, हैरत की बात यह कि इतने महत्वपूर्ण नियंत्रण कक्ष में संचार का कोई उपकरण नहीं। बाढ़ राहत कक्ष का टेलिफोन नंबर पिछले एक माह से खराब पड़ा है। संचार उपकरण न होने से बाढ़ राहत केंद्र में कोई भी व्यक्ति संपर्क नहीं कर सकता। वहीं, अधिशासी अभियंता उमेश कुमार का कहना है कि टेलिफोन लगवाया गया था लेकिन वह खराब हो गया। इसकी कंपलेन दर्ज कराई गई है।
इन बांधों की यहां से होती है निगरानी
झांसी बाढ़ राहत केंद्र से जिन बांधों की निगरानी होती है उनमें ललितपुर स्थित राजघाट बांध, माताटीला, गोविंद सागर, शहजाद, जामनी, सजनम, रोहिणी, उटारी, लोअर रोहिणी समेत झांसी के ढुकुवां, पारीछा, डोंगरी, पहुंज, सपरार, खपरार, पहाड़ी, लहचूरा, बडवार, पथरई, सिजार, लखेरी, कुरार बांध शामिल हैं।