झांसी। पहूंज बांध की मरम्मत एवं देखरेख के सवाल पर सिंचाई विभाग के अफसरों में आपस में ही ठन गई। बांध की मरम्मत का काम पूरा हो जाने से निर्माण इकाई पंचम इसे बेतवा अनुरक्षण इकाई को सौंपना चाहता है। वहीं, बेतवा अनुरक्षण कई खामियां बताते हुए इसे लेने को राजी नहीं। ऐसे में दोनों इकाईयों के अफसर आमने-सामने आ गए। अब मामला महकमे के आला अफसरों तक पहुंच चुका है।
झांसी के लिए पहूंज बांध लाइफ लाइन की तरह है। अंग्रेजी शासनकाल के दौरान वर्ष 1901 में यह बांध बना था। सौ साल से अधिक होने के चलते इसमें सुधार की जरूरत महसूस हुई। सिंचाई विभाग पंचम खंड ने करीब 100 करोड़ की लागत से बांध में रिटेनिंग वाल, गेट समेत अन्य कई सुधार कार्य कराए। सारा काम वर्ष 2018 में पूरा हो गया। अभी इसकी देखरेख का काम पंचम इकाई के पास है। लेकिन, काम खत्म हो जाने का हवाला देते हुए इकाई अब इसे देखरेख को राजी नहीं। पंचम इकाई का तर्क है काम खत्म होने के बाद रखरखाव का जिम्मा उनका नहीं। अब यह जिम्मा बेतवा अनुरक्षण इकाई उठाए लेकिन, बेतवा अनुरक्षण ईकाई अभी इसमें खामियां बता रहा। उनका कहना है जब तक इनको दूर नहीं किया जाता तब तक वह जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे। अनुरक्षण ईकाई के अफसरों का तर्क है कि मरम्मत करने वाली इकाई को तीन साल तक उसकी देखरेख करनी होती है। उनको इसका बजट भी दिया जाता है।
बता दें, पहूंज बांध के माध्यम से झांसी के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति होती है। रखरखाव न होने से बांध में पानी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित होती जा रही है लेकिन देखरेख के बजट का पेंच फंसा होने से दोनों ही इकाईयां रखरखाव की जिम्मेदारी उठाने को राजी नहीं हो रहीं। यह मामला अब आला अफसरों तक पहुंच चुका है।
इसके लिए दोनों इकाईयों से चर्चा की गई है। संबंधित अफसरों को तालमेल बिठाकर पंद्रह दिन के भीतर मामले को निपटाने के लिए कहा गया है। त्रिलोक चंद्र शर्मा मुख्य अभियंता, दक्षिण लेबल वन