झांसी। बेतवा नहर सिंचाई सिल्ट घोटाला के सूत्रधार एक्सईएन संजय कुमार के नपने के साथ ही नित नए खुलासे होने लगे हैं। विभागीय जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस एजेंसी को सर्वाधिक 46.53 लाख रुपये का भुगतान किया गया था उसका रजिस्ट्रेशन ही महज कुछ घंटे पहले कराया गया। आरोपी एक्सईएन ने सारे नियम-कानून ताक पर रखकर इसे न सिर्फ भारी-भरकम भुगतान किया बल्कि एजेंसी से जमानत धनराशि तक जमा नहीं कराई।
बेतवा नहर की रबी सीजन के दौरान वर्ष 2019 में सिल्ट सफाई एवं मरम्मत के कार्य में भारी-भरकम घपला सामने आया था। इस काम के एवज में अलग-अलग छह फर्मों को अग्रिम 77, 41,130 रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले की जांच कर रही कमेटी को जो बिल वाउचर मिले उनमें एक अक्तूबर 2019 को मां कामाक्षी सप्लायर को 9.99 लाख, 26 सितंबर 2019 को शब्द कंस्ट्रक्शन को 46.53 लाख, चार नवंबर 2019 को अनुज कंस्ट्रक्शन को 4.98 लाख, चार दिसंबर 2019 को रोहित कंस्ट्रक्शन को 5.90 लाख, जेपी इंटरप्राइजेज को 5.90 लाख और बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को 4.10 लाख रुपये को अग्रिम भुगतान दिया गया था। जांच कमेटी ने पड़ताल में पाया सबसे अधिक जिस शब्द कंस्ट्रक्शन को भुगतान हुआ उसका रजिस्ट्रेशन ही गलत तरीके से कराया गया। इस एजेंसी का रजिस्ट्रेशन सी श्रेणी के अंर्तगत हुआ था। प्रति वर्ष दस लाख रुपये का कार्य करने वाली एजेंसी का ही रजिस्ट्रेशन हो सकता था लेकिन, एक्सईएन ने फर्जी तरीके से इसका अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया। नियमों के मुताबिक अग्रिम भुगतान से पहले जमानत धनराशि जमा कराई जाती है। इसकी 75 प्रतिशत धनराशि ही अग्रिम भुगतान के तौर पर दी जा सकती है लेकिन, एक्सईएन ने शब्द कंस्ट्रक्शन से बगैर जमानत धनराशि जमा कराए उसे सबसे अधिक 44.53 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया। इस काम के अलावा शब्द कंस्ट्रक्शन के पास सिंचाई विभाग का कोई भी दूसरा काम नहीं था। वहीं, एक्सईएन उमेश कुमार का कहना है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक ही शासन ने कार्रवाई की है।