झांसी। सिद्धार्थ हत्याकांड एक सप्ताह गुजरने के बाद भी पुलिस के लिए पहेली बना है। कोई सबूत हाथ नहीं लगने पर पुलिस हवा में तीर चला रही है। हैरानी तो यह है कि हत्या अथवा आत्महत्या की गुत्थी भी अभी तक उलझी है।
पीडब्ल्यूडी आफीसर्स कॉलोनी के नजदीक बने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के क्वार्टर में परशुराम रहते हैं।
16 अगस्त को वह अपने परिवार के साथ साले मेवालाल उर्फ बन्ने निवासी बीएसएनएल कॉलोनी के त्रयोदशी संस्कार में शामिल होने बीएसएनएल कॉलोनी ललितपुर रोड गए थे। दोपहर करीब 12 बजे उनका पुत्र सिद्धार्थ वहां से चला आया। दोपहर करीब ढाई बजे जब परशुराम पत्नी के साथ लौटकर आए तो घर में सिद्धार्थ का खून से लथपथ शव पलंग पर पड़ा मिला। वह बबीना के एक स्कूल में 11वीं का छात्र था। मामले में पिता ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
वहीं, हत्याकांड के खुलासे में जुटी पुलिस एक सप्ताह बाद भी हवा में तीर चलाती नजर आ रही है। गुत्थी में उलझी पुलिस यह तक स्पष्ट नहीं कर सकी है कि सिद्धार्थ की हत्या हुई या उसने आत्महत्या की। पुलिस का कहना है कि सिद्धार्थ मामा के घर से बिना चाबी लेकर आया था। उसको घर का ताला तोड़ते समय आसपास के लोगों ने देखा था। इसके बाद उसके घर के अंदर न कोई आया और न गया। मगर पुलिस के सामने प्रश्न खड़े हुए हैं कि यदि कोई आया नहीं तो फिर जिस तमंचे से गोली चली वह कहां है? उसने फोटो क्यों फाड़ी? शर्ट के बटन कैसे टूटे? थानाध्यक्ष का कहना है कि जांच की जा रही है। अभी हत्या अथवा आत्महत्या के मसले पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।