झांसी। पहले बारिश नहीं हुई और बाद में नहरें नहीं चलीं, इससे खेत सूखे पड़े हैं और फसलें बर्बाद हो रहीं हैं। किसानों की यह पीड़ा रविवार को जिला योजना समिति की बैठक में विधायकों ने उठाई। गरौठा विधायक ने तो जिले के प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री से क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने तक की मांग कर डाली।
जिले में सामान्य बारिश का आंकड़ा 849 मिमी का है। लेकिन, पिछली बारिश में मानसून 450 मिमी पर ही थम गया था। इसके बाद खरीफ सीजन में भी बारिश धोखा दे गई। ऐसे में किसान नहरों के पानी पर निर्भर थे, लेकिन इनका भी समुचित संचालन नहीं हो पाया। इससे जिले के कई इलाकों के खेत सूखे रह गए। पानी की कमी की वजह से तिल, मूंग, उड़द और मूंगफली की फसल बुरी तरह से प्रभावित हो गई थी। अब रबी की फसल में भी पानी की कमी आड़े आ रही है। हालांकि, किसानों द्वारा पानी की कमी का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा था, बावजूद इसके अनसुनी जारी थी। लेकिन, रविवार को जिला योजना समिति की बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री के सामने विधायकों के स्वर मुखर हो गए। गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत ने कहा कि जिले में सबसे कम बारिश गरौठा इलाके में हुई।
नहरों से भी खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। इससे खरीफ की फसल तो खराब हो ही गई थी, लेकिन पानी की कमी की वजह से अब रबी की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। उन्होंने क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। वहीं, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने कहा कि उनके क्षेत्र में भी नहरें पर्याप्त नहीं चलीं, जिससे कई इलाकों में खेतों में सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने नहरों का जल्द संचालन शुरू कराए जाने की मांग की। किसान लंबे समय से पानी की समस्या उठा रहे हैं। लेकिन, अब चुनावी साल में विधायक भी उनकी पैरोकारी में जुट गए हैं। विधायकों द्वारा पानी की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकारी अमला भी सक्रिय हो गया है।