संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। भगवान भोलेनाथ की उपासना का श्रावण मास शुक्रवार से लगेगा। श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में डूबेंगे। घरों एवं मंदिरों में पार्थिव शिवलिंग निर्माण, रूद्राभिषेक सहित कई धार्मिक अनुष्ठान होंगे। वहीं, सभी शिव मंदिर आकर्षक सजाए गए हैं। भक्तों ने पूजा एवं अनुष्ठान के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।
महानगर के सभी प्राचीन शिव मंदिरों में ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर रात्रि तक हर-हर महादेव एवं बम बम भोले के जयकारे गूंजेंगे। पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, बड़ागांव गेट बाहर स्थित राजा बाबा महाकालेश्वर मंदिर, भूतनाथ मंदिर, मढि़या मुहल्ला स्थित महादेव मंदिर, श्री सिद्धेश्वर मंदिर सहित अन्य सभी शिवालयों में भोर से लेकर देर रात्रि तक भक्तों की कतार महादेव के दिव्य दर्शन के लिए नजर आएगी। श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान का जलाभिषेक, महाभिषेक, श्रृंगार एवं आरती करेंगे। महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार शिव की कृपा पाना बहुत सरल है। श्रावण मास में ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान का जलाभिषेक करे और बेलपत्र, धतूरा, पुष्प अर्पित करे। समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। उनके अनुसार सावन के पहले दिन पूर्वाषाढ़ा एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा।
बाक्स
सावन में यह रखे जाएंगे व्रत
कोछाभांवर। सावन माह में इस बार चार सोमवार 14, 21, 28 जुलाई एवं चार अगस्त को पड़ेंगे। श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखेंगे और महादेव एवं माता पार्वती की पूजा आराधना करेंगे। पहले सोमवार को गणेश चतुर्थी व्रत भी होगा। कामिका एकादशी व्रत 21 जुलाई एवं पुत्रदा एकादशी व्रत पांच अगस्त को है। सावन में मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है। यह 15, 22, 29 जुलाई एवं 5 अगस्त को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत 22 जुलाई एवं छह अगस्त को तथा शिव चतुर्दशी व्रत 23 जुलाई को है। ज्योतिषविद रजनी दीक्षित के अनुसार सावन माह में महादेव एवं माता पार्वती की पूजा एक साथ करने से भक्त का दांपत्य जीवन हमेशा सुखद रहता है।