झांसी में चल रही हॉकी इंडिया की प्रथम नॉर्थ जोन राष्ट्रीय सब जूनियर बालक-बालिका हॉकी चैंपियनशिप में मैदान में उतरे हर खिलाड़ी के दिल और दिमाग में कुछ ऐसा ही जुनून था। अमर उजाला और यूपी हॉकी के सहयोग से हुई। इस प्रतियोगिता के बालक और बालिका वर्ग में भले ही हरियाणा की टीम विजेता रही।
कुछ कर दिखाना है, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की धरती पर अपना भी सिक्का जमाना है। क्या हुआ जो हमारे पास संसाधन नहीं हैं, क्या हुआ जो छोटी सी उम्र में हाथों में ज्यादा बल नहीं है...लेकिन इस मैदान से खाली हाथ नहीं जाना है, जीत किसी की भी हो, लेकिन सबकी जुबान पर नाम हमारा ही होना चाहिए...।
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झांसी में चल रही हॉकी इंडिया की प्रथम नॉर्थ जोन राष्ट्रीय सब जूनियर बालक-बालिका हॉकी चैंपियनशिप में मैदान में उतरे हर खिलाड़ी के दिल और दिमाग में कुछ ऐसा ही जुनून था। अमर उजाला और यूपी हॉकी के सहयोग से हुई। इस प्रतियोगिता के बालक और बालिका वर्ग में भले ही हरियाणा की टीम विजेता रही।
लेकिन, प्रतियोगिता के दौरान कई ऐसे हॉकी के हुनरमंद सामने आए जिन्होंने अपने दम भर बेहतरीन उपलब्धि हासिल की। रविवार को समापन समारोह में वाकई लोगों की जुबान पर इनका नाम था...हमने ऐसे ही कुछ हॉकी के सिकंदरों के चेहरे पर सितारों को छूने की जो झलक देखी, उससे आपको भी रू-ब-रू करा रहे हैं।
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मैकेनिक के बेटे ने दागे 26 गोल, पूरी की पापा की तमन्ना
हॉकी चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा 26 गोल करने वाले यूपी टीम के कप्तान शाहरुख ने अपने पिता का सपना पूरा किया है। लखनऊ निवासी शाहरुख आठ साल से हॉकी खेल रहे हैं। उन्होंने चौथी बार नेशनल चैंपियनशिप में अपना दम दिखाया। शाहरुख के पिता तबस्सुर अली पेशे से मैकेनिक हैं।
प्रतियोगिता के समापन पर जब शाहरुख को मेडल और विशेष पुरस्कार दिया गया, तो उसे उन्होंने अपने पापा के नाम किया। शाहरुख के भाई आमिर भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
रहे हैं। शाहरुख का कहना है कि टीम को जिता तो नहीं पाया, लेकिन सबसे ज्यादा गोल दागकर पिता का सपना पूरा किया है। अब भारतीय टीम में खेलने की तमन्ना है।
झलकी बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब की खुशी
झांसी के आवास विकास की रहने वाली रश्मि रायकवार ने इस हॉकी मैच में यूपी टीम की ओर से सबसे ज्यादा 13 गोल किए। इस मैच में उन्होंने झांसी की पहचान और मेजर ध्यानचंद का मान बढ़ाया। गोरखपुर छात्रावास में हॉकी के गुर सीख रहीं रश्मि के पिता अशोक रायकवार टेलर हैं। वे कहती हैं कि अब ओलंपिक में जाना ही उनका सपना है। मैच में बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब पाकर रश्मि का चेहरा खिल गया।
टीम के कप्तान ने मजदूर पिता का बढ़ाया मान
हॉकी चैंपियनशिप जीतने वाली हरियाणा टीम के कप्तान अमित के पिता पेशे से मजदूर हैं। पिता अनिल ने कड़ी मेहनत करके अमित को हॉकी का अभ्यास शुरू कराया था। अमित ने बताया कि पापा ने मैच का परिणाम सुना तो वह बहुत खुश हुए। अमित पिछले पांच साल से हॉकी खेल रहे हैं। इससे पहले ओडिशा में हरियाणा की टीम को तीसरा स्थान मिला था। अमित ने कहा कि इस बार सोचकर आए थे कि जीतकर ही जाएंगे।
पहली बार में ही चख लिया जीत का स्वाद
हरियाणा टीम की कप्तान दीक्षा ने पहले ही मैच में जीत का स्वाद चख लिया। 10वीं की छात्रा दीक्षा अपना पहला राष्ट्रीय स्तर का मैच खेलने आई थीं। उनके पिता नीरज मलिक का देहांत हो चुका है। पिता के निधन के बाद दीक्षा ने मां मंजू देवी के प्रोत्साहित करने पर दोबारा खेलना शुरू किया और घर और स्टेडियम में प्रैक्टिस करके राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई और टीम को जीत दिलाई।