झांसी। कोरोना काल में बजट की कमी से जूझ रहा नगर निगम अपनी आय बढ़ाने के एजेंडे पर भी काम नहीं कर रहा है। आलम यह है कि गृहकर की वसूली में भी निगम के कर्मचारियों को पसीना आ रहा है। वित्तीय वर्ष समाप्ति में महज 20 दिन रह गए हैं और सात करोड़ की वसूली चुनौती बन रही है। वहीं, नोटिस देने के बाद भी बड़े बकायेदार भी गृहकर जमा करने नहीं पहुंचे हैं। इन पर कार्रवाई करने में भी नगर निगम के अधिकारी सुस्ती बरत रहे हैं।
कोरोना काल में नगर निगम ने गृहकर वसूली बंद कर दी थी। जबकि शासन ने करीब 25 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य दिया था। इसके बाद सितंबर से वसूली शुरू की गई, तो भी निगम की कई टीमें वसूली के लिए क्षेत्रों में गई ही नहीं थीं। लगातार बजट की कमी से जूझने के चलते नगर आयुक्त ने सभी कर संग्रहकर्ताओं और राजस्व निरीक्षकों को निर्देश जारी किए और कार्रवाई करना शुरू कर दिया। इसके बाद नगर निगम ने गृहकर वसूली बढ़ाई, लेकिन फिर भी खास तेजी नहीं आई है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में 20 दिन बचे हुए हैं और महज 18 करोड़ की वसूली हो सकी है। जबकि बीते साल इस वक्त तक 21 करोड़ रुपये की वसूली हो गई थी। वहीं 20 दिनों में सात दिन अवकाश में निकल जाएंगे। ऐसे में महज 13 दिनों में सात करोड़ रुपये की वसूली करना बड़ी चुनौती बनेगा। वसूली का यही हाल रहा, तो नए वित्तीय वर्ष में निगम के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगीं।
बचत से खर्च हो गए 40 करोड़
नगर निगम ने कोरोना काल में बजट न मिलने के चलते बचत से काम चलाया। राज्य वित्त आयोग के तहत निगम को 50 करोड़ रुपये शासन से मिले, लेकिन निगम ने वेतन आदि पर 64 करोड़ रुपये खर्च किए। इस मद में करीब 14 करोड़ रुपये पिछले वर्षों की बचत से दिए गए। जबकि निगम निधि में 23 करोड़ रुपये मिले और खर्च 50 करोड़ रुपये का हो गया। यहां भी 26 करोड़ रुपये पिछले अवशेष से खर्च हुए। अगर अवशेष न होता, तो निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन तक न दे पाता। जबकि इस बार महज चार करोड़ रुपये बचत हो पाएगी।
कुर्की की कार्रवाई अब तक नहीं
नगर निगम ने बड़े बकायेदारों को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में बकाया जमा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तमाम बकायेदारों ने अब तक बकाया जमा नहीं किया है। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी कुर्की की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
गृहकर वसूली के लिए तेजी से काम चल रहा है। कर संग्रहकर्ताओं और राजस्व निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोशिश है कि 31 मार्च तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाए। बकायेदारों पर भी कार्रवाई शुरू करने जा रहे हैं।
अमित सिंह, उप नगर आयुक्त