झांसी। अगर आप अत्यधिक शराब का सेवन और धूम्रपान करते हैं, तो इनसे तौबा कर लीजिए। शराब और धूम्रपान आपकी किडनी (गुर्दा) के लिए खतरा बन रहे हैं। विश्व में 10 में से एक व्यक्ति किडनी संबंधी रोग से पीड़ित है। जिले में ही 58 मरीजों का किडनी डायलसिस होता है। विश्व किडनी दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक किडनी रोग एक गैर संचारी रोग है। यह रोग सही जीवन शैली न अपनाने और अधिक धूम्रपान और शराब के अधिक सेवन से हो सकता है। जिला अस्पताल में स्थित किडनी डायलिसिस यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. एसएन कंचन बताते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को किडनी से संबंधित रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। साथ ही ज्यादा शराब और धूम्रपान करने वाले लोगों को भी किडनी खराब होने की संभावना रहती है। संतुलित दिनचर्या से किडनी की बीमारियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया मूल रूप से किडनी हमारे शरीर में उत्पन्न हुए जहर को बाहर निकालकर खून की सफाई का काम करती है। आज जबकि रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर और शुगर की बीमारी बढ़ रही है तो उससे किडनी के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। दरअसल किडनी हमारे शरीर में फि ल्टर का काम करती है। इससे शरीर में पानी और नमक की मात्रा नियंत्रित रहती है। किडनी फि ल्टर के अलावा खून की कमी को भी दूर करती है और हड्डियों को मजबूत रखती है। यदि किडनी में दिक्कत होती है तो फि र शरीर के दूसरे अंग भी ठीक तरह से काम नहीं करते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच कराने, खून की मात्रा और प्रोटीन की जांच के अलावा खून में यूरिया, किडनी की पथरी, रुकावट और कैंसर की बीमारी की भी नियमित जांच कराएं।
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किडनी खराब होने के लक्षण
- पेशाब में खून आना
- पेशाब में जलन होना और बार-बार आना
- पैरों और आंखों में सूजन आना
- शीघ्र थकान महसूस होना
- ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
- पेशाब की मात्रा में कमी होना
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ऐसे बचें बीमारी से
- नियमित व्यायाम करें
- रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं
- धूम्रपान, शराब के सेवन और फ ास्ट फू ड से बचें
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें
- दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करें
- ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जांच कराएं
- 35 वर्ष की उम्र के बाद खून व पेशाब की जांच अवश्य कराएं
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बच्चों में बढ़ रहा नेफ्रोटिक सिंड्रोम
झांसी। नेफ्र ोटिक सिंड्रोम एक आम किडनी की बीमारी है। पेशाब में प्रोटीन का जाना, रक्त में प्रोटीन की मात्रा में कमी, कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर और शरीर में सूजन इस बीमारी के लक्षण हैं। यह रोग बच्चों में देखा जाता है। सिंड्रोम में किडनी के छन्नी जैसे छेद बड़े हो जाने के कारण अतिरिक्त पानी और उत्सर्जी पदार्थों के साथ शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन भी पेशाब के साथ निकल जाता है। जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर में सूजन आने लगती है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया बताते हैं कि इस बीमारी के 90 फीसदी मरीज बच्चे होते हैं। दो से छह साल के बच्चों में दिखाई देता है। इसकी शुरुआत बुखार और खांसी के बाद होती है। पेशाब की जांच इसके उपचार के लिए जरूरी है।