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अफसरों की चाकरी, पटरियों से बेपरवाह

Tue, 22 Nov 2016 12:53 AM IST
Jhansi
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अफसरों की चाकरी, पटरियों से बेपरवाह - फोटो : Amar Ujala
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पुखरायां में रेल हादसे के पीछे इंजीनियरिंग विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। बताया जाता है कि ट्रैक में रेल फ्रेक्चर था। दुर्घटना वाली रात पेट्रोलिंग नहीं होने से इसका पता नहीं लग पाया। पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारी उस रात रेल अफसरों के बंगलों पर चाकरी में जुटे हुए थे।
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पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच रविवार को हुए इंदौर-पटना एक्सप्रेस की दुर्घटना ने एक बार फिर रेल संरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटनास्थल पर पहु़ंचे रेल राज्यमंत्री ने अफसरों से बात करने के बाद कहा था कि 99 प्रतिशत रेल फ्रेक्चर होने से हादसा हुआ। इससे साफ होता है कि अगर रेल फ्रेक्चर का समय पर पता चल जाता तो हादसा नहीं होता। रेलवे के भरोसेमंद सूत्रों की माने तो उरई-पुखरायां सेक्शन में कई दिनों से रात में कर्मचारी पेट्रोलिंग नहीं कर रहे थे। इस लापरवाही का खामियाजा133 यात्रियों को अपनी जान गवां कर चुकाना पड़ा।  
 दरअसल, रात में पटरियों पर पेट्रोलिंग के लिए ट्रैकमैनों को पटरियों पर लगाया जाता है। मगर, हादसे वाले सेक्शन में पेट्रोलिंग नहीं हो रही थी। कर्मचारी रेलवे अफसरों के बंगलों पर काम कर रहे थे। अधिकांश सेक्शनों का एक सा ही हाल है। रेलवे कर्मचारी ट्रैकमेन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी रवि ने भी कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को मन की बात में लिखा था कि बंगलों पर लगे ट्रैकमेन, चाबी मैन से जहां रेलवे को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, वहीं संरक्षा से भी सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। अफसरों की इस चाकरी से कभी भी कोई बड़ा रेल हादसा हो सकता है। इस रेलवे कर्मचारी नेता की आशंका पुखरायां में हुई रेल हादसे से सामने आ गई है।
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‘अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रात में पेट्रोलिंग नहीं हुई थी। यह बात जांच में ही पता लग सकेगी।’
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी डिवीजन।

नहीं चेता रेल प्रशासन
रेलवे कर्मचारी ट्रैकमेन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी रवि ने बताया कि सेक्शनों में कर्मचारियों की कमी से बढ़ रहे वर्क लोड से वे कई बार रेल प्रशासन को अवगत कर चुके हैं। बंगलों पर लगे ट्रैकमैनों से पटरियों पर काम नहीं कराया जाएगा, तो ऐसे हादसे होते रहेंगे।

यह होती है पेट्रोलिंग
रात में पटरियों की सुरक्षा के लिए ट्रैकमैनों की तैनाती होती हैं। एक साथ दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगती हैं, जिसमें प्रत्येक कर्मचारी विपरीत दिशाओं में तीन किलोमीटर तक के ट्रैक की पेट्रोलिंग (निगरानी) करता है। कर्मचारियों की ड्यूटी रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच लगाई जाती है। इसी तरह सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक कीमैन पेट्रोलिंग के लिए लगाए जाते हैं।

मंडल में हैं करीब छह हजार ट्रैकमैन   
रेल मंडल की पटरियों की रखवाली के लिए 23 डिपो बनाए गए हैं। इन डिपो में 190 यूनिटें काम कर रही हैं, जिसमें करीब छह हजार कर्मचारी तैनात हैं। मेन लाइन की एक यूनिट में 25 कर्मचारी व सिंगल लाइन की यूनिट में 15 कर्मचारी तैनात रहते हैं।
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