संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पात्रता का निर्धारण अधिकारी नहीं, सेंसरयुक्त नई तकनीक से किया जाएगा। इसके लिए, आईटीआई स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) के ड्राइविंग और टेस्टिंग ट्रैक में बदलाव किया गया है। ट्रैक को सेंसर और कैमरों से लैस किया गया है। अभी इंटीग्रेटेड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। जल्द ही यह कार्य पूर्ण करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
नए ट्रैक का निर्माण मारुति इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पूरा करने के बाद विभाग को सौंप दिया है। अब यहां सेंसरयुक्त कैमरों को इंटीग्रेटेड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। यह कार्य इसी सप्ताह में पूर्ण होने की उम्मीद है। इसके बाद यह ट्रैक चालू हो जाएगा। हर आवेदक का टेस्ट ऑटोमेशन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड होगा। इससे पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी। आवेदक को पास या फेल होने की लाइव जानकारी मिलेगी।
ऑटोमेटिक व्यवस्था में देने होंगे विभिन्न तरह के सेंसरयुक्त टेस्ट
ड्राइविंग और टेस्टिंग ट्रैक पर सेंसर लगाने के बाद चालक का परीक्षण ऑटोमेटिक हो जाएगा। आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट के दौरान हिल, रोड साइड पार्किंग, आठ बनाना, एस बनाना, एच बनाना एवं रिवर्स आदि के लिए सेंसर युक्त टेस्ट देना होगा। सभी टेस्ट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने के बाद ही आवेदकों का डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) जारी किया जाएगा। टेस्ट में फेल होने के बाद आवेदक सात दिन बाद फिर से फार्म भरकर टेस्ट दे सकता है। इसमें केवल आवेदक द्वारा ऑनलाइन टेस्ट की फीस जमा करनी पड़ेगी।
- आईटीआई स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में अभी मैनुअल व्यवस्था है। अब यहां ट्रैक पर कैमरे और सेंसर लगाकर व्यवस्था ऑटोमेटिक की गई है। सिस्टम को इंटीग्रेटेड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। यह कार्य पूर्ण होते ही इस ट्रैक पर टेस्ट की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। - चरण सिंह, आरआई, परिवहन विभाग झांसी