बिना ई-वे बिल के अब माल लाए तो उसे वाणिज्यकर विभाग जब्त कर लेगा। टैक्स के साथ जुर्माना अदा करने पर ही व्यापारी माल को छुटा पाएंगे। जांच के लिए विभाग का सचल दल बृहस्पतिवार से सड़कों पर दौड़ेगा। बुधवार को कमिश्नर मुख्यालय ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
जीएसटी में दूसरे राज्यों से माल मंगाने के लिए कारोबारियों को 15 अगस्त की रात 12 बजे से ई-वे बिल लगाना जरूरी कर दिया गया है। नई व्यवस्था में आयात घोषणा पत्र को ई-वे बिल और बहती को टीडीएफ (ट्रांजिस्ट डिकलरेशन फार्म) नाम दे दिया गया है। अभी तक आयात घोषणा पत्र या अन्य कागजात कम मिलने पर सिक्योरिटी जमा कराके माल छोड़ दिया जाता था, मगर अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था में कारोबारी को टैक्स के साथ जुर्माना भी मौके पर जमा करना है, तभी माल छूट सकेगा। बृहस्पतिवार से वाहनों की जांच के लिए सचल दल सड़क पर दौड़ने लगेंगे। मालूम हो कि, झांसी जनपद में पांच सचल दल तैनात हैं।
‘ ई-वे बिल नहीं मिलने पर गाड़ियां रोकी जाएंगी। टैक्स व जुर्माना जमा करने पर ही उनको छोड़ा जाएगा। ई-वे बिल और टीडीएफ दोनों में ही कारोबारी को ऑनलाइन नया जरूरी है। पंजीकरण के लिए साइट खोल दी गई है।’
एसएस मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) वाणिज्यकर।
ये हैं नए नियम
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- उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी स्थान से प्रदेश के अंदर 5000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के माल को मंगाने पर ई-वे बिल 01 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर या दूसरे प्रदेश में एक लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के मेंथा ऑयल, सुपारी, लोहा और इस्पात तथा सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी ई-वे बिल 02 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश के अंदर ई-कामर्स ऑपरेटरों अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोरियर अभिकर्ताओं से माल मंगाने पर ई-वे बिल 03 लगाना होगा।
- उत्तर प्रदेश की सीमा से 5000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का माल निकालने पर टीडीएफ-01 फार्म जनरेट कराना होगा।
- यदि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए निजी वाहन से व्यक्तिगत सामान के रूप में या किसी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहन के माध्यम से अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ 50,000 रुपये से कम मूल्य का माल लाता है तो इसमें ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं है।
- फार्म ई-वे बिल 01, ई-वे बिल 02, ई-वे बिल 03 डाउनलोड करने से पूर्व विभागीय वेबसाइट एचटीटीपी:// सीओएमटीएएक्स.यूपी.एनआईसी.आईएन पर ऑलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
- टीडीएफ में ट्रांसपोर्टरों को नया पंजीकरण कराना जरूरी नहीं है।