झांसी। पहले पांच मतों का अवैध होना और फिर द्वितीय और तृतीय वरीयता मतों से मतदाताओं की दूरी ने प्रत्याशियों की मुसीबत बढ़ाई। चुनाव में द्वितीय और तृतीय वरीयता वोटों से जीतने की उम्मीद लगाए बैठे प्रत्याशियों को मतदाताओं ने खूब झटका दिया।
स्नातक चुनाव में वरीयता क्रम में मतदान किया जाता है। कई बार प्रथम वरीयता मतों में पिछड़ने वाले प्रत्याशी द्वितीय वरीयता वोटों की गिनती में आगे निकल जाते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग और प्रत्याशी मतदाताओं को वोट का गणित समझाते हैं। लेकिन इस बार चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी मतदाताओं को वरीयता क्रम का गणित समझाने में नाकाम रहे। आलम यह हुआ कि महज 20 फीसदी मतदाताओं ने ही द्वितीय और तृतीय वरीयता मतों का प्रयोग किया। इसके चलते मतगणना के दौरान कई प्रत्याशियों को द्वितीय और तृतीय वरीयता के मत मिले ही नहीं थे। जबकि कई मतपत्र पर के वल एक ही प्रत्याशी को वोट दिया गया था। बताया जाता है कि भाजपा प्रत्याशी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा पिछले चुनावों में द्वितीय वरीयता वोटों से ही जीते हैं। साल 2014 के चुनाव में डॉ. यज्ञदत्त शर्मा को प्रथम वरीयता में 554 मत मिले थे। जबकि द्वितीय वरीयता के बाद वे 4732 मत पाकर विजयी हुए थे। लेकिन इस बार द्वितीय वरीयता वोटों ने उनका साथ नहीं दिया। पिछले चुनाव में चार हजार मतों से जीत पाने वाले प्रत्याशी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा इस बार चार हजार मतों से हार गए। सपा के प्रत्याशी डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा के डॉ. यज्ञदत्त शर्मा को 4333 मतों से हराया है। पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को करीब 22 हजार मत मिले थे। इस बार उनको 18760 मत मिल सके।
बसपा तीसरे नंबर पर आई
साल 2014 में हुए झांसी-इलाहाबाद खंड स्नातक चुनाव में बसपा का प्रदर्शन पिछड़ गया। चुनाव में बसपा समर्थित उम्मीदवार हरिश्चंद्र पटेल को 8772 मत मिले। जबकि पिछले चुनाव में बसपा के डॉ. बाबूलाल तिवारी दूसरे नंबर पर रहे थे।