झांसी। आसमान से आग बरस रही है। तापमान 46 डिग्री के पार जा रहा है। नदियां और तालाब सूखने लगे हैं। जंगली जानवर तो पानी की तलाश में आबादी की तरफ आने लगे हैं। रीछना पहाड़ी से पानी की तलाश में गांवों की तरफ निकले एक भालू की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। वहीं गर्मी में खूंखार हो रहे लकड़बग्घे 1 मार्च से 12 मई तक 30 ग्रामीणों को हमला करके घायल कर चुके हैं। वन विभाग ने भी अलर्ट जारी कर दिया है।
अगर झांसी जनपद की बात करें तो 33495.95 हेक्टेयर क्षेत्रफल में घना जंगल है। इन जंगलों में ही तेंदुआ, लकड़बग्घा और नील गाय सहित कई प्रजातियों के जंगली जानवर अपना आशियाना बनाए हुए हैं। हालांकि जंगलों में तालाब हैं लेकिन भीषण गर्मी में यह तालाब सूख जाते हैं और जानवरों के सामने पानी का बड़ा संकट ख़ड़ा हो जाता है। ऐसे में यह जानवर जंगल के आसपास के इलाके बरुआसागर, चिरगांव, मोंठ, गुरसराय और बबीना क्षेत्र में आबादी की तरफ पहुंच जाते हैं। ग्रामीण इनको रोकते हैं तो हमला कर देते हैं।
ललितपुर में 74 हजार से भी अधिक हेक्टेयर में जंगल फैला है। यहां वन विभाग के मडावरा रेंज में स्थित रीछना पहाड़ी पर भालू रहते हैं। वन विभाग के मुताबिक भालुओं की संख्या 235 से भी ज्यादा है। इन दिनों में पहाड़ी पर भी पानी का टोटा हो गया है। जंगल में जो तालाब था वह भी सूख रहा है। ऐसे में भालू भी पानी की तलाश में आबादी की तरफ निकल जाते हैं। 3 अप्रैल को एक भालू पानी की तलाश में निकला और ललितपुर में ट्रेन से कटकर मर गया। ग्रामीणों ने भी आबादी में घुसे भालुओं को कई दफा भगाया है।
वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
झांसी। वन विभाग ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। वन अफसरों का कहना है कि जंगलों में पानी खत्म हो रहा है ऐसे में जानवर आबादी की तरफ आ रहे हैं। लिहाजा ग्रामीणों को भी सतर्क किया जाए। वहीं वन विभाग के अफसरों की भी गश्त बढ़ा दी गई है। खासतौर पर जो डैम हैं उनके आसपास बसे गांवों में लोगों को सतर्क किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि बरसात तक यह दिक्कत रहेगी।
प्रभागीय वन अधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि कई वर्षों बाद तापमान में इतनी तेजी देखी जा रही है। जंगलों के तालाब और पोखरों से पानी सूख गया है। जंगली जानवर पानी की तलाश में ग्रामीण इलाकों का रुख कर रहे हैं। ग्रामीण रोकते हैं तो वह हमला कर देते हैं।
दो महीने में बीस लोगों को सांप ने डसा
इस समय जिले भर में गर्मी ने प्रचंड रूप अख्तियार किया हुआ है। वहीं इस समय ही ग्रामीण इलाकों में ईटों को पकाने के लिए भट्टे लगाए जाते हैं। इन भट्टों में कई दिनों तक तेज आग में ईंटों को पकाया जाता है। जिससे जमीन में कई मीटर तक गर्मी का असर होता है। जिसके चलते सांप भी बिल छोड़कर अन्य जगहों पर भागने को मजबूर हैं। जिसके चलते सांप आक्रामक रुख अख्तियार करे हुए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ढाई महीने के भीतर ही 20 से अधिक लोगों को सांप ने डसा है।
हादसों का सबब बनीं नील गाय
शहर के आस-पास के जंगलों में नील गाय की संख्या खासी है। जंगलों में नदियां और तालाबों में पानी सूख जाने के कारण पानी की तलाश में नीलगाय शहर का रुख कर रही है। जिसके चलते आए दिन वाहनों से नील गाय टकराने की घटनाएं हो रहीं हैं।