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स्कूल खोलने में जल्दबाजी न हो, अब तो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई में रम गए

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school reopen delayed
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झांसी। कोविड के दौर में अधिकतर परिजन अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों से सोशल डिस्टेंसिंग की उम्मीद करना बेमानी होगी। लगातार कक्षा में चार-पांच घंटे तक मास्क पहनकर बैठना भी मुश्किल है। इससे उनके शरीर में ऑक्सीजन की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में स्कूल खोलने में जल्दबाजी कतई न हो।
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अभिभावकों का कहना है कि शुरूआत में ऑनलाइन पढ़ाई की बच्चों को आदत नहीं थी तो पढ़ने में काफी दिक्कतें आईं। मगर अब बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं में रम चुके हैं। फिर भला स्कूल खोलने में जल्दबाजी क्यों की जा रही है। अभी कम से कम दो-तीन महीने तक स्कूल नहीं खुलने चाहिए। जब वैक्सीन आ जाएगी, उसके बाद ही इस दिशा में विचार करें। अभी यदि बच्चों को स्कूल भेजेंगे तो संक्रमण तेजी से एक से दूसरे में फैलने का डर है।
स्कूल खुलने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। अब तो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई में पूरी तरह मझ गए हैं। इसलिए अभी ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहनी चाहिए। - डॉ. छवि सहगल, गल्ला मंडी मार्ग।
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कोरोना से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि कुछ महीनों तक ऑनलाइन जारी रहें। कोर्स समय पर पूरा हो रहा है। इसलिए अभी स्कूल न खुलें। - डॉ. दीपिका त्रिपाठी, मेडिकल कैंपस।
खेल-कूद में बच्चे सबकुछ भूल जाते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान नहीं रखेंगे। वहीं, क्लास में चार-पांच घंटे तक मास्क पहने रहना भी बच्चों के लिए ठीक नहीं है। - रीता राय, सिविल लाइन।
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