झांसी। छात्रवृत्ति के लिए उपस्थिति अनिवार्यता के नियमों में फेरबदल की तैयारी चल रही है। शासन स्तर पर इसके लिए फीडबैक जुटाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक कोविड के चलते इस दफे 75 फीसदी उपस्थिति की अनिवार्यता घटाई जा सकती है।
कोविड-19 के प्रभाव के चलते इस बार शैक्षिक गतिविधियां पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहीं। परीक्षा समेत प्रवेश प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं की जा सकी। इसका सीधा असर विभिन्न छात्रवृत्ति वितरण पर भी पड़ रहा है। मौजूदा नियमों के मुताबिक सिर्फ उन्हीं संस्थागत छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जाती है जिनकी कक्षा में उपस्थिति न्यूनतम 75 फीसदी हो लेकिन, कोरोना महामारी के चलते यह शर्त पूरी नहीं हो पा रही। ऐसे में समाज कल्याण विभाग उहापोह में फंसा हुआ है। बता दें, समाज कल्याण विभाग की ओर से कक्षा नौ से लेकर स्नातक स्तर पर विभिन्न वर्गों में करीब बीस हजार से अधिक छात्रों को छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। तयशुदा समय सारणी के मुताबिक दो अक्तूबर तक छात्रवृत्तियां भी दी जानी हैं। ऐसे में समाज कल्याण विभाग में
उपस्थिति को लेकर मंथन चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आकस्मिक परिस्थितियों के चलते उपस्थिति की समयसीमा घटाए जाने की तैयारी है। परीक्षा में शामिल छात्रों की उपस्थिति पूर्ण मानते हुए उनको छात्रवृत्ति दी जा सकती है हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है लेकिन, उम्मीद जताई जा रही कि अगले माह तक पर निर्णय कर लिया जाएगा। गड़बड़ी रोकने के लिए पहले ही इस बार छात्रवृत्ति के लिए आधार संख्या का होना अनिवार्य किया जा चुका है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील सिंह का कहना है कि इस बारे में शासन स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। निर्णय होने पर उसके मुताबिक कदम उठाया जाएगा।