झांसी। साड़ी में कमी होने के बाद भी उसे न बदलना एक व्यापारी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता न्यायालय ने साड़ी व्यापारी को रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में शिवाजी नगर स्थित राजपूत कॉलोनी निवासी वी एम सिंह ने अवगत कराया था कि वह पत्नी के साथ सीपरी बाजार के सुभाष मार्केट जे एम के प्लाजा के सामने स्थित मेसर्स देव साड़ी की दुकान पर खरीदारी करने गए थे। उन्होंने 1830 व 450 रुपये की दो साड़ियां खरीदीं, जिनका उन्होंने नकद भुगतान किया। विपक्षी ने दोनों साड़ियों को फॉल व पीको लगाने हेतु अपने पास रख लिया। जब वह नौ जून 2014 को विपक्षी की दुकान से साड़ियां लेकर घर आया तो देखा 1830 रुपये कीमत वाली साड़ी में उत्पादकीय दोष है। वह साड़ी को लेकर विपक्षी की दुकान पर आया और उत्पादकीय दोष बताकर साड़ी को बदलने का आग्रह किया। मगर विपक्षी ने साड़ी बदलने से इंकार कर दिया।
इस पर उसे परिवाद दायर करना पड़ा। वहीं, विपक्षी ने अपने जवाब में कहा कि वह मात्र साड़ी विक्रय करता है। साड़ी में फॉल व पीको लगाने का कार्य नहीं करता है। प्रस्तुत तथ्यों पाया गया कि वादी ने एक सौ रुपये अतिरिक्त अदा किए थे। न्यायालय ने पाया कि साड़ी में उत्पादकीय दोष इसके निर्माण के समय से ही था। ऐसे में विपक्षी का कर्तव्य था कि साड़ी की कीमत में दस प्रतिशत धनराशि काटकर ग्राहक को नई साड़ी प्रदान कर देता। विपक्षी ने साड़ी वापस लेने से इंकार करके सेवा में स्पष्ट रूप से कमी की है।
इस पर न्यायालय ने विपक्षी को निर्देशित किया है कि वह इस निर्णय के दो माह के भीतर प्रश्नगत साड़ी की कीमत 1830 रुपये में नब्बे फीसदी धनराशि अर्थात 1647 रुपये ग्राहक को अदा करे। साथ ही ग्राहक को मानसिक कष्ट के लिए पंद्रह सौ रुपये व वाद व्यय पर एक हजार रुपये अदा करने के निर्देश दिए हैं।