संवाद न्यूज एजेंसी
चिरगांव। तुलसी आश्रम में आयोजित श्रीराम महायज्ञ के पांचवें दिन यज्ञाचार्य शंकरलाल शास्त्री ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की आत्मा है, इसके माध्यम से संस्कृत भाषा व सनातन संस्कृति की रक्षा होती है। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, शुद्धता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है।
दोपहर में भागवताचार्य रमाकांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु की लीलाएं भक्तों को अपार सुख और आनंद प्रदान करती हैं, जो केवल सच्ची भक्ति से ही प्राप्त हो सकता है। रामचरितमानस प्रवचन में संतोष ने हनुमानजी की कथाओं का वर्णन किया। महेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भरत चरित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भरत जैसा त्यागी और धर्मनिष्ठ भाई दुर्लभ है।