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Jhansi News: छह खाद्य पदार्थों के नमूने अधोमानक, आठ फेल

Sat, 17 Oct 2026 02:40 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
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ललितपुर। आगामी त्योहारों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा चलाई गई विशेष जांच अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के 14 नमूने असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं, जिनमें कई नामी दुकानें भी शामिल हैं। मिलावट के इस काले कारोबार से आम उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिस पर विभाग ने सख्त विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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त्योहारों से पहले मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है। जिले के विभिन्न बाजारों से लिए गए नमूनों की लैब रिपोर्ट से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। जांच में बेसन के लड्डू, मावा और घी के छह नमूने पूरी तरह असुरक्षित पाए गए, वहीं आठ नमूने अधोमानक श्रेणी के मिले हैं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वितीय विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि त्योहारों पर मिलावट की आशंका थी, इसलिए विशेष अभियान चलाकर नमूने राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए थे। रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि कुछ नामी दुकानों में भी भारी मिलावट की गई थी। अधिकारियों ने सभी दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

असुरक्षित पाए गए नमूने
पुराना बाजार, महरौनी के मयंक जैन के प्रतिष्ठान से 26 अगस्त को लिया गया बेसन का लड्डू असुरक्षित मिला। मयूर जैन के प्रतिष्ठान से मावा और राम मनोहर गुप्ता के प्रतिष्ठान से मावा भी असुरक्षित पाए गए। तालबेहट के ग्राम सरखड़ी निवासी तिलक यादव के प्रतिष्ठान से 17 अगस्त को लिया गया घी अधोमानक व असुरक्षित था। केशव परिहार के प्रतिष्ठान से 18 अगस्त को लिया गया मावा भी इसी श्रेणी में मिला। अनुपम चतुर्वेदी के प्रतिष्ठान से लिया गया मावा भी अधोमानक व असुरक्षित पाया गया।
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अधोमानक पाए गए नमूने
तालबेहट में बालचंद के प्रतिष्ठान से 14 अगस्त को बूंदी के लड्डू का नमूना अधोमानक मिला। नझाई बाजार स्थित महावीर स्वीट्स (सुरेंद्र कुमार) के प्रतिष्ठान से बेसन का नमूना भी अधोमानक पाया गया। अजनेरिया दूध डेयरी, तालाबपुरा से 26 अगस्त को घी का नमूना अधोमानक था। कॉफी हाउस, सिविल लाइन से 27 अगस्त को छेना और न्यू मोहन मावा भंडार से मिल्क केक का नमूना भी अधोमानक मिला। मयंक जैन के प्रतिष्ठान से 27 अगस्त को मावा, कॉफी हाउस, सिविल लाइन से मावा और न्यू मोहन मावा भंडार से पनीर का नमूना भी अधोमानक पाए गए।

एफएसएसएआई की भूमिका
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी करता है। इसके तहत खाद्य सामग्री निर्माताओं और विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाता है। जनपद में तीन हजार से अधिक पंजीकरण दर्ज हैं, साथ ही 270 से अधिक लाइसेंस भी बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

ये हो सकती हैं बीमारियां
मिलावटी मावा या नकली घी के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (आंतों में सूजन) की गंभीर समस्या हो सकती है। लड्डू और मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए अक्सर प्रतिबंधित रंगों (जैसे मेटानिल येलो) या केमिकल का उपयोग किया जाता है, जिससे लिवर और किडनी को भारी नुकसान पहुंच सकता है और लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अधोमानक या नकली घी में मिलाए जाने वाले हाइड्रोजनीकृत तेल (जैसे डालडा या पाम ऑयल) शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है— डॉ. विशाल जैन, चिकित्सक।


त्योहारों पर मिलावट की आशंका के चलते विशेष अभियान चलाकर नमूने राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि कुछ नामी दुकानों में खाद्य पदार्थों में भारी मिलावट की गई थी। सभी दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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— विनोद कुमार शर्मा, खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वितीय
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