झांसी। मप्र सरकार की झांसी में स्थित इमारतों से गृहकर वसूली का मामला उलझ गया है। यहां स्थित मप्र सरकार के आधा दर्जन से अधिक कार्यालय अपनी संपत्ति पर लगने वाला कर चुकाने को राजी नहीं हैं। इससे निगम की लाखों रुपये की वसूली पर पेच फंस गया हालांकि यह सभी कार्यालय जलकर का नियमित भुगतान कर रहे हैं।
नगर निगम सीमा के भीतर मप्र सरकार के स्वामित्व की राजघाट नहर परियोजना कार्यालय, राजघाट सिंचाई कॉलोनी, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस, भंडारण निगम के कार्यालय हैं। शहरी सीमा के भीतर होने के नाते नगर निगम ने इन सभी इमारतों का गृहकर तय कर रखा है। राजघाट नहर परियोजना के अंतर्गत नंदनपुरा स्थित सिंचाई कॉलोनी बड़े भूभाग में है। यह कॉलोनी पूरी तरह आवासीय है लेकिन, इसका गृहकर मप्र सरकार नहीं चुका रही है। निगम अफसरों का कहना है कि अभी करीब 10 लाख रुपया सिर्फ इसी कॉलोनी के ऊपर बकाया हो चुका।
वित्तीय कटौती के बाद निगम प्रशासन ने सरकारी इमारतों से बकाया वसूलने की भागदौड़ शुरू की। इसमें मालूम चला कि मप्र सरकार के स्वामित्व वाली इमारतें कई वर्षों से गृहकर नहीं अदा कर रही हैं। वसूली के लिए कुछ दिन पहले नंदनपुरा स्थित राजघाट परियोजना कार्यालय में नगर निगम की टीम भेजी गई लेकिन, मप्र शासन के अफसरों ने टैक्स चुकाने से साफ इंकार कर दिया। उनका कहना था कि मप्र में सरकारी भवनों से कोई टैक्स नहीं लिया जाता लिहाजा यहां भी गृहकर नहीं चुकाएंगे। निगम टीम ने यूपी के नगर निगम अधिनियम का जिक्र करते हुए हाउसटैक्स जमा करने को अनिवार्य बताया लेकिन, मप्र के अफसरों ने अपने नियम-कायदों का हवाला देते हुए इसे चुकाने से इंकार कर दिया। काफी जद्दोजहद के बाद भी मप्र के अफसर राजी नहीं हुए तब निगम की टीम मजबूरन बैरंग लौट आई। नगर निगम में इन कॉलोनियों की फाइल तलब हुई। पड़ताल में मालूम चला कि इनकी ओर से वाटरटैक्स लगातार जमा हो रहा है लेकिन, मांग भेजे जाने के बावजूद हाउसटैक्स जमा नहीं किया जाता। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी धीरेंद्र मोहन कटियार का कहना है कि मप्र की जितनी इमारतें हैं, उनको यहां के नियमों के मुताबिक टैक्स जमा करना होगा। इस संबंध में उच्च स्तर से पत्राचार किया जाएगा।