झांसी। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पंद्रह वर्ष पूर्व खोला गया स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) का सेंटर झांसी में अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। इसे बंद करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सेंटर का साजो सामान सैफई ले जाने की योजना है। जबकि, यहां बचे एकमात्र कर्मचारी को दिल्ली बुलाया जा रहा है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की नगरी में साई सेंटर का बंद होना खेल जगत के लिए बड़ा आघात होगा।
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल के माध्यम से झांसी का नाम विश्व पटल पर पहुंचाया था। उनकी खेल विरासत को संजोए रखने के लिए झांसी में साल 2001 में साई के सेंटर की स्थापना की गई थी। इसका कार्यालय ध्यानचंद स्टेडियम के कार्यालय में खोला गया था। शुरुआती दिनों में यह सेंटर बेहद सक्रिय रहा। यहां हॉकी, कबड्डी व जिम्नास्टिक के कोचों की तैनाती की गई थी और खिलाड़ियों को तराशने का काम भी शुरू कर दिया गया था।
इसके अलावा हॉकी के लिए डे-बोर्डिंग स्कीम शुरू की गई थी, जिसमें नवोदित खिलाड़ियों को स्टाइपेंड व किट भी मुहैया कराई जाती थी। इससे खेल गतिविधियों के विकास की तमाम उम्मीदें जग गईं थीं। लेकिन, धीरे-धीरे यह उपेक्षा का शिकार हो गया। यहां तैनात कोच व कर्मचारियों की रवानगी होती गई और नया कोई मिला नहीं। वर्तमान में स्थिति यह है कि यहां केवल अब एक ही कोच तैनात हैं और वही प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
लेकिन, अब वेंटीलेटर पर जा पहुंचे साई सेंटर को पूरी तरह से बंद करने की तैयारी है। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। पिछले दिनों लखनऊ सेंटर से आए दो कर्मचारियों ने इसकी जानकारी यहां तैनात कोच को उपलब्ध करा दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सेंटर में बचे एकमात्र कोच को दिल्ली भेजा जा रहा है। जबकि, झांसी साई सेंटर द्वारा संचालित की जा रही 12 प्लेटफार्म की जिम व हॉकी से संबंधित खेल उपकरणों को मुख्यमंत्री के गांव सैफई भेजा जाएगा।
‘झांसी सेंटर को बंद करने का अभी कोई लिखित आदेश तो नहीं मिला है, परंतु पिछले दिनों लखनऊ सेंटर से आए कर्मचारियों ने यहां उपलब्ध उपकरणों को सैफई स्थानांतरित करने की सूचना जरूर दी है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी है कि उन्हें दिल्ली भेज दिया जाएगा। हालांकि, अभी मैं अवकाश पर हूं, लिहाजा इस बारे में ज्यादा और कुछ नहीं बता सकता।’
- अनिल कुमार रावत, सेंटर इंचार्ज /कोच
पहले भी हो चुका है प्रयास
झांसी साई सेंटर को बंद करने का प्रयास चार-पांच साल पहले भी किया गया था। यहां से इसे जबलपुर ले जाने की तैयारी थी। लेकिन, इसके विरोध में स्थानीय खेल संगठन लामबंद हो गए थे। राजनीतिक दल के नुमाइंदे भी इसके विरोध में मैदान में उतर आए थे, जिसके चलते इसका स्थानांतरण नहीं हो पाया था।
उमा से शुरू और उन्हीं पर खत्म
साल 2001 में केंद्र सरकार में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रहते हुए उमा भारती ने झांसी में साई सेंटर की स्थापना में महती भूमिका अदा की थी। लेकिन, अब यह भी एक इत्तफाक है कि उमा भारती के क्षेत्रीय सांसद व केंद्र में मंत्री रहते हुए इसे बंद करने की तैयारियां की जा रही हैं।