russian technology agriculture
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बुंदेलखंड की जलवायु को देखते हुए यहां खेती के नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। रूस की पद्धति से खेती कर यहां उत्पादन बढ़ाने के उपाय खोजे जा रहे हैं। इसी के तहत रूस के वैज्ञानिकों की देखरेख में जिले के तीन गांवों में रूसी पद्धति से बुवाई कराई गई। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस पद्धति से बुवाई कराने पर तीस प्रतिशत से अधिक पैदावार होगी। परिणामों का आकलन तीस दिन बाद किया जाएगा।
बुंदेलखंड के किसानों की फसलें उन्नत हों और उनकी आय बढ़े, इसी उद्देश्य से रूस के कृषि वैज्ञानिकों का दल भारतीय राष्ट्रीय सहकारिता संघ के निदेशक यशपाल सिंह यादव की अगुवाई में झांसी आया। दल ने तिलैथा, मुस्तरा और भोजला गांवों में किसानों को रसियन आर्गेनिक तरीकों से फसल की अच्छी पैदावार करने के टिप्स दिए। वैज्ञानिक सुमिलोव लूरी और लायसेरको ल्वान ने किसानों को जैविक खेती के बारे में बताया। संजीव झा ने उनकी वाक्यों का हिंदी में अनुवाद किया। उन्होंने बताया कि रसियन बायोडेक्स, आर्गेमिका-पी व सेव द वैक्टीरिया के मिश्रण से बीज की बुवाई करने पर 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक फसल पैदा होगी।
यशपाल सिंह ने बताया कि बीते साल शाहजहांपुर जिले में रूसी पद्धति से फसल बोई गई थी, जिसके अच्छे परिणाम आए थे। इस पद्धति से खेती करने पर फर्टिलाइजर और केमिकल का कम इस्तेमाल होता है। फसल का तीस दिन बाद आकलन होगा। इससे यह भी पता चलेगा कि पारंपरिक खेती की तुलना में रूसी पद्धति से जैविक खेती में मुनाफा का कितनी संभावना है। इस दौरान ज्ञानेंद्र यादव, तिलैथा के प्रधान विनय कुमार, भोजला के पूर्व प्रधान हरगोविंद सिंह यादव, रोहित यादव मौजूद रहे।